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लोस चुनाव: आठ पर्चे खारिज,मैदान में 12 उम्मीदवार

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आठ पर्चे खारिज, मैदान में 12 उम्मीदवार
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लोस चुनाव: प्रस्तावकों के हस्ताक्षर मिलान की वजह से अवैध हुए पर्चे
भाजपा, गठबंधन, कांग्रेस में मुख्य मुकाबले के आसार
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र-61 सीट के लिए पर्चा भरे आठ आवेदकों का सपना पहले पायदान पर ही टूट गया। बुधवार को जांच में खामियां पाए जाने के बाद उन सभी के नामांकन रद्द कर दिए गए। इस प्रकार अब भाजपा, कांग्रेस और महा गठबंधन के प्रत्याशी के अलावा विभिन्न दलों व तीन निर्दलों को मिलाकर कुल 12 उम्मीदवारों में सियासी मुकाबला होगा।
16 अप्रैल से शुरू हुई नामांकन प्रक्रिया में 23 अप्रैल को समय सीमा समाप्त होने तक सांसद बनने के लिए 20 दावेदारों ने नामांकन किया। यद्यपि कुल 26 आवेदन नामांकन के लिए खरीदे गए थे लेकिन छह अवधि समाप्त होने तक नामांकन करने नहीं पहुंचे। जिला निर्वाचन अधिकारी/जिलाधिकारी डॉ राजशेखर ने बताया कि 26 अप्रैल तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। उसी समय उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे।
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इनके वैध पाए गए पर्चे
कांग्रेस प्रत्याशी राज किशोर सिंह, गठबंधन प्रत्याशी रामप्रसाद चौधरी, भाजपा प्रत्याशी व सांसद हरीश द्विवेदी के अलावा तीन निर्दल चंद्रमणि पांडेय, भगवान दास और रंगीलाल के पर्चे वैध पाए गए। इसके अलावा पंकज दुबे (लोक गठबंधन पार्टी), दामोदराचार्य (हिंदू महासभा), रोहित पाठक (हिंदुस्तान निर्माण दल), राष्ट्रवादी पार्टी आफ इंडिया के प्रमोद शुक्ल, जनहित किसान पार्टी के राम प्रसाद, भासपा सुहेलदेव से विनोद कुमार राजभर का नामांकन भी वैध मिले हैं।

खारिज हुए आठ पर्चे
आम जनता पार्टी के साधूशरन, आल इंडिया फारवर्ड ब्लॉक के लायक अली, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया से बाल गोविंद यादव, महा परिवार पार्टी से सोनू उर्फ अंबरीशदेव गुप्ता ने पर्चा भरा था। सर्वोदय भारत पार्टी के शीतला प्रसाद ओझा, नागरिक एकता पार्टी के रघुनाथ के अलावा अजय मोहन गांधी एवं अखिलेश कुमार ने निर्दल के रूप में नामांकन किया था।
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असमंजस खत्म
उम्मीद से काफी ज्यादा यानी आठ नामांकन रद्द होने के बाद डबल ईवीएम की टेंशन खत्म हो गई है। अब सिर्फ 12 प्रत्याशी ही बचे हैं। जबकि ईवीएम में 15 प्लस वन (नोटा बटन) तक की जगह है। यानी बूथों पर डबल ईवीएम से मतदान कराने की भारी भरकम कवायद से प्रशासन को मुक्ति मिल गई। अब यदि सभी उम्मीदवार नाम वापसी की सीमा के बाद भी बरकरार रहते हैं तो भी डबल ईवीएम की जरूरत नहीं होगी।
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