बस्ती। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज का शुक्रवार को औचक निरीक्षण करने पहुंचे डीएम डॉक्टर राजशेखर ने बच्चों और शिक्षकों के साथ तहरी का जायका लिया। मेनू के अनुसार पाकशाला में तैयार की गई तहरी का डीएम के साथ लुत्फ उठाकर छात्राएं बाग-बाग हो गईं।
करीब सौ साल पहले 1910 ई. में स्थापित इस विद्यालय के नाम 10वीं और 12वीं की सभी बोर्ड परीक्षाओं में शत-प्रतिशत उत्तीर्ण होने का रिकॉर्ड है। निरीक्षण में छठवीं से 12वीं तक के 1251 छात्राओं वाले कैंपस में औसत उपस्थिति लगभग 80 प्रतिशत रही, जिस पर डीएम ने संतोष जताया, लेकिन शिक्षकों की कमी डीएम को खल गई। वहां शिक्षकों के कुल 41 सृजित पद के सापेक्ष केवल 26 शिक्षक कार्यरत हैं। कई प्रवक्ता एक से अधिक विषय पढ़ा रहे हैं।
सुबह करीब 10.55 बजे पहुंचे डीएम ने प्रधानाचार्य से सप्ताह में खेल के लिए कम से कम 2 पीरियड्स सुनिश्चित करने का निर्देश दिया ताकि विद्यार्थियों का संतुलित रूप से शारीरिक और मानसिक विकास को सुनिश्चित किया जा सके। यह जानकर डीएम खुश हो गए कि कैंपस में शौचालयों को साफ रखा जाता है और पीने के लिए आरओ का पानी उपलब्ध है। हाल ही में पूरे परिसर में सौर्य उर्जा संयंत्र स्थापित किया गया है। जीजीआईसी के सभी लड़कियों का अनुशासन, तत्परता और उत्साह ने डीएम को काफी प्रभावित किया।
होनहारों का हुनरमंदी का तोहफा
होनहार छात्राओं की प्रतिभा में और निखार लाने (श्रेष्ठ प्रतिभा) के लिए जीजीआईसी की प्रिंसिपल ने कई मांग की, जिसे डीएम ने तत्काल मंजूरी दी। जिला पंचायत के जरिए परिसर में दो सौ मीटर सीसी रोड नवंबर तक तैयार करने, आईएएस, आईपीएस, पीसीएस, पीपीएस और अन्य संबद्ध सेवाओं में जाने की इच्छा रखने वाली 11वीं और 12वीं की छात्राओं के लिए 23 अक्टूबर को प्रशासनिक सेवाएं : अवसर और चुनौतियां विषयक संगोष्ठी दोपहर 12 बजे आयोजित की जाएगी। जिसे डीएम सहित अन्य संबोधित करेंगे। जिला प्रशासन की तरफ से स्कूल प्रबंधन की सहमति से नवंबर में 11 वीं और 12 वीं कक्षा के सभी बच्चों के लिए करियर परामर्श कार्यशाला आयोजित की जाएगी। साथ ही जिला स्पोर्ट्स ऑफिसर को बास्केट बॉल कोर्ट की मरम्मत, चार बास्केट बॉल और बैडमिंटन किट मुहैया कराया जाएगा।
बिटिया अफसर से ज्यादा डॉक्टरी करने को बेताब
बस्ती। फिजा की बदलती तासीर कहें या अबो हवा का असर, लेकिन बेटियों में आईएएस, आईपीएस, इंजीनियर और उद्योगपति बनने से ज्यादा डॉक्टरी की ओर झुकाव ज्यादा है। उन्हें एमपी और एमएलए से कहीं अधिक डॉक्टर बनना पसंद है। सिर्फ 10 प्रतिशत लड़कियां इंजीनियर बनने का ख्वाब देखती हैं। जीजीआईसी में 10वीं से 12वीं तक की करीब तीन सौ छात्राओं ने डीएम डा.राजशेखर से शुक्रवार को जब अपना ड्रीम कैरियर शेयर किया तो वह हैरान रह गए। सबसे ज्यादा 60 प्रतिशत छात्राओं ने डाक्टर बनने का ख्वाब है। सबसे कम अभियंत्रण सेवा को महज 10 प्रतिशत लड़कियां तरजीह दे रही हैं। प्रशासनिक सेवाओं में भी केवल 15 प्रतिशत बालिकाओं ने जाने की बात बताई। जबकि 15 प्रतिशत छात्राएं व्यवसाय, राजनीति और अन्य क्षेत्र में जाना चाहती हैं। जिले की लैंगिक असमानता दूर करने की मुहिम छेड़ रखे डीएम ने इसे कॅरियर के क्षेत्र में जबरदस्त असंतुलन की आहट के रूप में लेते हैं। शुक्रवार को वे राजकीय कन्या इंटर कॉलेज के निरीक्षण के दौरान छात्राओं से रू-ब-रू हो रहे थे। डीएम के मुताबिक जॉब काउंसलिंग और कॅरियर ओरिएंटेड अभियान छेड़कर छात्र-छात्राओं के साथ ही अभिभावकों को जगाने की जरूरत है।
विस्फोटक हो जाएगी लैैंगिक असमानता
छात्राओं को कॅरियर ओरिएंटेड काउंसलिंग और विभिन्न सेवा क्षेत्र के बारे में परामर्श देने के अवसर मार्गदर्शन सत्र की जरूरत बताई गई। सामाजिक ढांचे का असंतुलन घातक स्थिति तक पहुंच जाएगा। उपाय नहीं किए गए तो प्रत्येक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के बजाए घट जाएगी।
डॉ. राज शेखर, आईएएस
जगाने की जरूरत
मेडिकल क्षेत्र को लड़कियां ज्यादा सुरक्षित मानती हैं। हालांकि इसके लिए अभिभावकों में सेवा क्षेत्र के बारे में कम जागरूक होना और प्रेरित करने वाले विषयों-संभावनाओं का उदाहरण कम है, जिससे छात्राओं को प्रेरित करने का तत्व नहीं मिल रहा।
नीलम सिंह, प्रिंसिपल जीजीआईसी-बस्ती