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मकान जलाने में सात को सात साल की सजा

Fri, 28 Sep 2018 10:36 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला बस्ती
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दिल्ली हाईकोर्ट
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बस्ती। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश चतुर्थ पृथ्वीपाल यादव की अदालत ने रिहायशी मकान जला कर नुकसान पहुंचाने के सात आरोपियों को सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक पर सात-सात हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। इसे अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अर्थदंड से प्राप्त धनराशि की आधी रकम पीड़ित को दिया जाएगा।
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सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजेंद्र प्रसाद यादव व अधिवक्ता परमात्मा प्रसाद चौधरी ने कोर्ट में घटना का विवरण रखा। बताया कि कप्तानगंज थाना क्षेत्र करमिया बसंत लाल निवासी राम बरन यादव की तहरीर पर थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई। इसमें कहा गया कि मुकदमा बाजी को लेकर गांव के राम प्यारे रंजिश थी। वादी ने अपने चक की जमीन में रिहायशी मकान बना लिया। जिससे विपक्षी खासे नाराज थे। 21 दिसंबर 1991 को दो बजे दिन में करीब चालीस लोग गाड़ी से पहुंचे। इसमें राम प्यारे, रम्मन, सतिराम, तिलकराम, राम अवतार, शिव सरन, शिवमूरत, कन्हैया लाल, रामसूरत व अन्य अज्ञात पहुंचे और मकान गिराकर आग लगा दी। मकान में रखा सारा सामान जल गया। रिपोर्ट के आधार पर दस के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल हुआ। आरोप तय हुआ। अभियोजन की ओर से गवाह व पीड़ित का बयान हुआ। मुकदमा के दौरान राम प्यारे व शिवकरन की मौत हो गई जबकि राम अवतार नाबालिग साबित हुआ। न्यायधीश ने गवाहों के बयान व सबूत के आधार पर सात को सजा सुनाई गई।
इसी क्रम में विशेष न्यायाधीश पाक्सो मदन लाल निगम की अदालत ने किशोरी को बहला फुसला कर अगवा करने दुष्कर्म व पाक्सो में दोषी करार देते हुए आरोपी लालगंज थाना क्षेत्र के फरदा निवासी अखिलेश राज को आठ वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। उन्हें 25 हजार अर्थदंड भी देना होगा। एडीजे त्वरित न्यायालय प्रथम हर्ष अग्रवाल की अदालत ने दुष्कर्म के मामले में दोषी करार देते हुए आरोपी पीर मोहम्मद को दस वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही बीस हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। इसे अदा न करने पर एक वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
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