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जीएसटी के विरोध में बंद रहीं दुकानें

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बस्ती। पहली जुलाई से लागू हो रहा जीएसटी को लेकर व्यापारियों ने जबर्दस्त विरोध दर्ज कराया है। शहर में चाय पान तक की दुकानें दोपहर एक बजे तक बंद रहीं। जबकि कस्बों और ग्रामीणांचल में रोज की भांति दुकानें खुली रहीं।
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जीएसटी लागू किए जाने के विरोध में शुक्रवार को बस्ती उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के आवाहन पर बस्ती बंद में दुकानदार शामिल हुए। बड़े प्रतिष्ठानों से लेकर चाय, पान की दुकानें तक बंद रहीं। वर्षों बाद छोटे से लेकर बड़े व्यापारियों की एकजुटता देखकर व्यापारी नेताओं ने सड़क पर हुंकार भरी। एक स्वर से कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार बिना व्यापारियों को विश्वास में लिए, उन्हें प्रशिक्षण दिए बिना हड़बड़ी में जीएसटी लागू कर रही है। इसके व्यापक दुष्परिणाम सामने आएंगे। पाण्डेय बाजार, नई बाजार, मंगल बाजार, रेलवे स्टेशन, दक्षिण दरवाजा, रोडवेज, अस्पताल चौराहा, गांधीनगर, कम्पनी बाग, कचहरी, कटरा आदि में बंदी का प्रभाव रहा। संगठन के जिला अध्यक्ष आनन्द राजपाल ने कहा कि जीएसटी समिति ने जब राष्ट्रीय अध्यक्ष श्याम बिहारी मिश्र के सुझावों को मानने से इंकार कर दिया तो ऐसे में आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं था। नगर अध्यक्ष नन्द किशोर साहू ने कहा कि हैरान करनवाली बात है कि जम्मू-कश्मीर में भाजपा समर्थित सरकार होने के बावजूद आखिर वहां जीएसटी लागू क्यों नहीं किया जा रहा है। कहा कि केंद्र सरकार का दोहरा चरित्र सामने आ गया है। कहा गया था कि एक देश, एक कर की व्यवस्था लागू होगी किन्तु सरकार इसे व्यवहारिक रूप देने में विफल रही। व्यापारी विरोधी मुद्दों को लेकर चरणबद्ध ढंग से आंदोलन जारी रहेगा। जिला महामंत्री सूर्यकुमार शुक्ल ने कहा कि जीएसटी का वर्तमान ढाचा व्यापारी हितों के विरुद्ध है। जब तक सरकार व्यापारियों को अपने विश्वास में नहीं लेती इसे प्रभावी ढंग से लागू कर पाना काफी कठिन है।
व्यापारियों की मांगें
जीएसटी को सरल, पारदर्शी एवं व्यवहारिक बनाया जाए।
भामाशाह (व्यापारी) को सजा की व्यवस्था समाप्त करें।
ई-वे बिल व्यापारियों पर लागू नहीं किया जाए।
महीने में तीन रिर्टन के स्थान पर एक त्रैमासिक रिटर्न व्यवस्था हो।
जीएसटी की उच्चतम दर 15 प्रतिशत से अधिक नहीं किया जाए।
रिर्टन की व्यवस्था आनलाइन व मैनुअल दोनों प्रकार से हो।
मंडी शुल्क को जीएसटी में समाहित किया जाए।
ब्रांडेड कपड़ा, अनाज, तिलहन, कृषि यंत्र, कीटनाशक, एवं जीवन की आवश्यक वस्तुएं मुक्त रखी जाएं।

शामिल रहे प्रमुख व्यापारी
अशोक गुप्ता, ओम प्रकाश चौधरी, राकेश जायसवाल, युगुल किशोर जायसवाल, अवधेश त्रिपाठी, राजेश त्रिपाठी, अनिल गुप्ता, रवीश मद्धेशिया, सौमित्र मालवीय, अदालत प्रसाद, हरिमोहन वर्मा, पवन कुमार वर्मा, शिवनरायन वर्मा, खुनखुन वर्मा, निरंकार, राजेश त्रिपाठी, श्यामलाल पंसारी, आशीष कुमार, रवि प्रकाश मोदनवाल, ओम प्रकाश आर्य, अनूप अरोरा, प्रभुप्रीत सिंह, लालजी सिंह, भल्लू, झिनकान, अतुल अरोरा, शैलेन्द्र, मो. आलम, बंटी, अरविन्द, विजय, राधेश्याम, शिवजी, पवन, रहीम, दिनेश दूबे, राजन ठाकुर, सुखदेव मल्होत्रा, राम प्रकाश बरनवाल, सुनील गुप्ता, लक्ष्मी प्रसाद, रविन्द्रपाल उर्फ जल्लू, ओम प्रकाश मिश्र, कमल जायसवाल समेत बस्ती उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के पदाधिकारी, व्यापारी शामिल रहे।
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सपा भी जीएसटी के विरोध में
बस्ती। जीएसटी पूर्णतया जन विरोधी है। भाजपा सरकार की ओर से लाया गया यह सेवाकर गरीबों के साथ अन्यपूर्ण कार्रवाई है। रोजमर्रा की चींजें महंगी हो जाएंगी। यह कहना है सपा जिला सचिव फूलचंद श्रीवास्तव का। शुक्रवार को एक विज्ञप्ति में कहा कि सपा पूर्णतया व्यापारियों के साथ है।
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