बीएसए लगा गए 45 लाख का चूना
बस्ती।
29 लाख रुपये की छपाई घोटाले में आरोपी बनाए गए पूर्व बीएसए एमपी वर्मा पर अनियमित रूप से चार शिक्षा मित्रों का लगभग तीन साल का वेतन आदेश जारी करने का आरोप लगा है। लगभग 45 लाख रुपये का वेतन जारी होने का दावा किया गया है। एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह के प्रतिनिधि हरीश सिंह नेे सीएम को साक्ष्य के साथ पूर्व बीएसए पर आरोप लगाते हुए इसकी जांच कराने और कार्रवाई करने की मांग की है। आरोप है कि बीएसए ने चार ऐसे शिक्षा मित्रों का वेतन जारी करने का आदेश दे दिया, जिनके शैक्षिक प्रमाण-पत्रों और अंकपत्रों को यूपी बोर्ड फर्जी मान चुका है। वेतन देने का आधार एक शपथ-पत्र को बनाया गया, जिसमें चारों से किसी विवाद होने दशा में ब्याज सहित धन वापस करने की कसम खाई गई है।
जून 2014 में जिले के लगभग तीन हजार शिक्षा मित्रों का समायोजन सरकार ने सहायक अध्यापक के पद पर करने का आदेश जारी किया। आदेश के मुताबिक इन सभ की तो तैनाती कर दी गई, मगर वेतन तब दिया गया जब इन सभी का शैक्षिक प्रमाण-पत्र और अंकपत्र यूपी बोर्ड से सत्यापन होकर आ गए। इनमें 22 ऐसे शिक्षा मित्र रहे, जिनके प्रमाण-पत्रों का सत्यापन बोर्ड ने संदिग्ध मानते हुए नहीं किया। एक तरह से बोर्ड ने इन सभी प्रमाण-पत्रों के सही होने की पुष्टि करने से इन्कार कर दिया। बीएसए कार्यालय ने इस सभी सत्यापन कराने का कई मौका दिया। कार्यालय लगभग छह बार बोर्ड को सत्यापन के लिए भेज चुका, मगर हर बार बोर्ड बिना सत्यापन के वापस करता रहा। उसके बाद इस सभी को बर्खास्त करने के लिए नोटिस भी जारी किया गया। मगर विभाग की लचर और बचाओ नीति के चलते इन सभी की बर्खास्तगी नहीं हो सकी। इसी बीच पूर्व बीएसए एमपी वर्मा ने 26 मई 17 को चार शिक्षा मित्रों से एक शपथ-पत्र लिया, जिसमें विवाद होने की स्थित में तीन साल का वेतन मय ब्याज सहित वापस करने की बात कही गई। इसी आधार पर बीएसए ने वेतन जारी करने का आदेश जारी कर दिया। अब चूंकि सरकार ने समायोजन को ही निरस्त कर दिया, तो ऐसे में विभाग के सामने ऐसे चार शिक्षा मित्रों से लगभग तीन साल का वेतन वसूलने का संकट खड़ा हो गया जो न तो शिक्षा मित्र रहे और सहायक अध्यापक ही हैं।
इन शिक्षा मित्रों का जारी हुआ वेतन
शपथ पत्र के आधार पर जिन चार शिक्षा मित्रों का वेतन आदेश उनमें गौर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय खुटहना के विनय कुमार शुक्ल, बहादुरपुर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय सुजावलपुर की रीता यादव, सल्टौआ ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय तेनुआ के आशुतोष मनि त्रिपाठी और इसी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय बिछियागंज की कंचन वर्मा का नाम शामिल है।
मामला संज्ञान में नहीं है:बीएसए
बीएसए सत्येंद्र कुमार सिंह ने बताया मामला उनके संज्ञान में नहीं है। कहा कि अगर वेतन जारी हुआ है तो शपथ-पत्र के मुुताबिक चारों से वेतन की वसूली कराई जाएगी।
बीएसए ने पीएनबी साऊंघाट से मांगा घपले का 29 लाख
बस्ती। 29 लाख रुपये के छपाई गोलमाल के मामले में नया मोड़ आ गया है। शासन ने बीएसए को साऊंघाट शाखा के पीएनबी बैंक से गबन किए गए धन की वसूली करने का आदेश दिया है। बैंक पर आरोप है कि जान-बूझकर गाजीपुर जिला उद्योग प्रिंटिंग प्रेस के बजाए बस्ती के जिला उद्योग प्रिंटिंग प्रेस के प्रबंधक के नाम रकम भेज दी। इस पर बीएसए ने बैंक को धन वापस करने को लिखा है।
छात्र-छात्राओं के प्रोग्रेस रिपोर्ट की छपाई के लिए पूर्व बीएसए एमपी वर्मा ने गाजीपुर के जिला उद्योग प्रिंटिंग प्रेस के प्रबंधक के नाम आदेश जारी किया। यह प्रिटिंग प्रेस जिला पंचायत राज अधिकारी के अधीन होता है। बाद में इसकी शिकायत हुई, जिस पर कमिश्नर दिनेश कुमार सिंह ने एडी बेसिक एसपी त्रिपाठी को जांच कराने का आदेश पांच माह पहले दिया। जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिपोर्ट के मुताबिक छपाई का आदेश तो गाजीपुर के नाम हुआ मगर सारा कार्य बस्ती से हुआ। भुगतान के लिए जब गाजीपुर प्रिंटिंग प्रेस ने बिल दिया तो आरटीजीएस के तहत भुगतान सर्व शिक्षा अभियान के खाते से कर दिया गया। मगर जब इसकी जांच हुई तो साजिश का भंडाफोड़ हुआ। भुगतान गाजीपुर के स्थान पर अर्बन कोऑपरेटिव बैंक बस्ती के जिला उद्योग प्रिंटिंग प्रेस के प्रबंधक प्रदीप कुमार श्रीवास्तव के नाम हुआ। प्रबंधक की ओर से धन भी खर्च कर दिया गया। इसकी रिपोर्ट बैंक ने जांच टीम को दी है। इस साजिश की रिपोर्ट शासन को दी गई। शासन ने इसके लिए उस बैंक को जिम्मेदार माना जिसने गाजीपुर के बजाए बस्ती को भुगतान किया। बीएसए सत्येंद्र कुुमार सिंह ने बताया राज्य परियोजना निदेशक सर्व शिक्षा अभियान की ओर से पीएनबी से धन की वसूली करने को कहा है। बताया कि इसके लिए बैंक शाखा को धन वापस करने को लिखा गया है।