पांच घंटे रामजानकी मार्ग जाम कर जताया विरोध
कुदरहा।
संतकबीर नगर जनपद के वजूद में आने के बाद से भरवलिया उर्फ टिकुइया दो जिलों के बीच सीमांकन का दंश झेल रहा है। विकास योजनाएं बस्ती से संचालित होती हैं, जबकि राजस्व गांव, थाना की जिम्मेदारी संतकबीरनगर की है। घाघरा की तबाही के बाद अब पीडीएस के खाद्यान्न का लाभ न मिल पाने से चूल्हे पर संकट हो गया है। इन स्थितियों से ग्रामीणों के आक्रोश इस कदर बढ़ गया कि बुधवार को सुबह छह बजे ग्रामीण परिवार सहित सड़क पर उतर गए। यहां रामजानकी मार्ग जाम कर दिया। पांच घंटे जाम के बाद जिला प्रशासन ने पहल करते हुए आक्रोशित ग्रामीणों से वार्ता कर उन्हें सहयोग का भरोसा दिलाया, तब जाकर ग्रामीण माने।
वर्ष 1997 में संतकबीरनगर नए जिले के रूप में स्थापित किया गया। उसी दौरान भरवलिया उर्फ टिकुइया को उक्त जिले में शामिल कर दिया गया। यह गांव छपिया ग्राम पंचायत से जुड़ा था। इसकी दूरी उक्त गांव से आठ किमी है। जबकि बस्ती जिले के चकिया ग्राम पंचायत से यह गांव सटा हुआ है। ऐसे में गांव के लोग चाहते हैं कि चकिया से ही उन्हें जोड़ दिया जाए, जिससे उनका सारा कार्य बस्ती जिले से हो। विकास तो बस्ती जनपद से हो रहा है, मगर इस गांव का थाना व राजस्व ग्राम संतकबीरनगर जिले में है। पिछले वर्ष आई घाघरा की बाढ़ ने उनका खेत आदि नदी में समेट लिया, इस बार की बाढ़ में उनका बची-खुची जमीन भी चली गई। खेत तो पानी में चला गया, इस गांव के लोगों का खाद्यान्न सीमा विवाद के चलते उलझ गया है। चूंकि इस गांव की अधिकांश आबादी मजदूरी से ही पेट चलाती है और बाढ़ के चलते काम भी मुश्किल से मिल रहा है। ऐसे में पीडीएस का राशन ही उनका सहारा था, क्योंकि मजदूरी न मिलने की दशा में चूल्हा जलना संभव नहीं हो पाता। इसी को लेकर ग्रामीणों ने पांच सितंबर को उच्चाधिकारियों से मुलाकात की, मगर समस्या का निदान न हो सका। इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने मंगलवार को चकिया गांव के निकट स्थित राम जानकी पर उतर गए। रास्ता जाम कर दिया। इससे दोनों ओर वाहनों का लंबा काफिला लग गया। जानकारी होती ही पुलिस हरकत में आ गई। चौकी प्रभारी दुर्गा प्रसाद और प्रभारी खंड विकास अधिकारी सतीश शुक्ल मौके पर पहुंचे, मगर आक्रोशित ग्रामीण उनकी एक नहीं सुने। इसके बाद थानाध्यक्ष विक्रम सिंह भी वहां पहुंच गए और मान मनौवल शुरू किया, मगर ग्रामीण टस से मस नहीं हुए। थोड़ी ही देर में जिला प्रशासन ने डीसी मनरेगा अनिल कुमार सिंह और पूर्ति निरीक्षक पंकज शाही को प्रतिनिधि के रूप में भेजा। घंटे भर की मशक्कत के बाद यह दोनों अधिकारी ग्रामीणों को मनाने में कामयाब रहे। इसके बाद जाम हट गया। इस मौके पर प्रधान गेंना, पूर्व प्रधान राजेश यादव, राधेश्याम, कुंता, शोभावती, बुझावन, कल्पनाथ, सियाराम, शिवमूरत, राम किशोर, वर्मा दीन, दिनेश, संतराम, शिवराम, अंगूरा, रीनू व राजदेश आदि मौजूद रहे।
जाम से हलकान हुए यात्री
रामजानकी मार्ग पर टिकुइया के ग्रामीणों के जाम में पांच घंटे तक स्कूली बस, रिक्शा, साइकिल, बस, बाइक आदि फंसे रहे। इसके चलते बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पाए। दस बजे के बाद जाम खुला तो भी घंटों यातायात प्रभावित रहा।
बात बनी हड़ताल टली, संकट बरकरार
बस्ती। जिला अस्पताल के पीआईसीयू में तैनात पुष्पा सेल्स के ठेका कर्मियों की हड़ताल बातचीत के बाद टल गई, मगर आंदोलन का संकट अब भी बरकरार है। वह इस नाते कि जिन कर्मियों को अब तक 13 हजार रुपये महीना मानदेय तय किया गया था उसे निदेशक संचारी ने घटा का दस हजार कर दिया है। इसे लेकर ठेका कर्मी क्षुब्ध हैं।
जिला अस्पताल में संचालित पीआईसीयू वार्ड में तैनात हैं पुष्पा सेल्स के ठेका कर्मी। इनकी संख्या पांच है। पिछले पांच माह से इन कर्मियों को मानदेय के नाम पर एक पाई का भी भुगतान नहीं किया गया। परिणाम स्वरूप इन कर्मियों ने काम बंद करने का निर्णय लेते हुए आंदोलन की चेेतावनी दी। एक दिन पूर्व इस मामले में सीएमओ डॉ. जेएलएम कुशवाहा, एसआईसी डॉ. एके श्रीवास्तव की पहल पर डीएम ने संबंधित एजेंसी के जिम्मेदारों से बातचीत की। स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद कर्मियों का मानदेय देने के लिए एजेंसी तैयार हो गई और जल्द से जल्द भुगतान पर सहमति बन गई। इसके बाद हड़ताल की रणनीति बदल गई। इधर इन कर्मियों के मानदेय को लेकर अब नए सिरे से मामला गरमाने लगा है। अब इन कर्मियों को मात्र दस हजार रुपये ही मानदेय मिलेगा। यह निर्देश निदेशक संचारी ने दिए हैं। सीएमओ डॉ. कुशवाहा ने कहा कि निर्देश के मुताबिक संबंधित एजेंसी मानदेय उपलब्ध कराएगी। इसमें स्वास्थ्य विभाग की कोई भूमिका नहीं है। क्योंकि वे कर्मचारी स्वास्थ्य विभाग के नहीं बल्कि ठेके के हैं। ऐसे में एजेंसी उनका मानदेय तय करती है।
ठेेका सफाई कर्मियों ने पालिका घेरा
बस्ती।
नगर पालिका परिषद के अधीन सफाई कार्य में लिए गए 65 ठेका कर्मी अब आंदोलन पर उतर गए हैं। मंगलवार को इन कर्मियों ने पालिका कार्यालय घेर लिया। दो घंटे तक कार्यालय घेरे इन कर्मियों से ईओ ओम प्रकाश ने मुलाकात की। उन्हें वापस काम पर रखने के आश्वासन पर सफाई कर्मियों ने आंदोलन स्थगित कर दिया।
उल्लेखनीय है कि नगर पालिका ने सफाई कार्य के लिए 65 कर्मियों को ठेके पर लिया। इन कर्मियों ने पांच साल तक पूरे मनोयोग से कार्य किया, मगर 31 अगस्त को उनको बगैर नोटिस हटा दिया गया। यही नहीं इन सफाई कर्मियों को दो माह का वेतन भी नहीं मिला है। पालिका प्रशासन ने सफाई निरीक्षक व नायक से कार्य लेने से मना कर दिया। इसके बाद यह कर्मी जिलाधिकारी, ईओ सहित अन्य उच्चाधिकारियों से नौकरी वापस दिलाने की मांग की, मगर कोई सुनने को तैयार नहीं था। हारकर इन कर्मियों ने नगर पालिका का घेराव किया।
पिछले पांच वर्षों से कार्यरत इन सफाई कर्मियों ने कहा कि उनकी सेवा के बदले नगर पालिका ने नौकरी ले ली। जबकि वे ही शहर को साफ रखने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। दो घंटे तक आंदोलन के बाद पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी ओम प्रकाश ने इनसे मुलाकात की। बातचीत कर समस्या का हल निकालने का आश्वासन दिया। तब जाकर यह माने और वापस लौट गए। इस मौके पर मुरलीधर, जाहिद, पवन कुमार, राम मिलन, इस्माइल, सुरेंद्र कुमार, कन्हैया लाल, गंगराम, कमलेश, गनपत, संतोष गौड़, महेश, उदयभान, मोहम्मद आजम, संजय, राम लगन, अब्दुल सलाम, राजेश, असलम, शन्नो, लवकुश, रमजान, सोनू सहित 65 कर्मी मौजूद रहे। ईओ ने कहा कि इस मामले को उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने के बाद उनके निर्देशों के क्रम में कार्य लिया जाएगा।