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18 सालों से 14 क्षेत्र पंचायतों ने नहीं कराया आडिट

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बस्ती। जिले के एक भी क्षेत्र पंचायत ने पिछले 18 साल से खर्च किए गए करोड़ों रुपये का हिसाब-किताब नहीं दिया। आडिट न कराने के पीछे बड़े पैमाने पर सरकारी धन के गोलमाल करना बताया गया है। इसकी पुष्टि जिला लेखा परीक्षा अधिकारी वीरेंद्र प्रताप सिंह यह कहते हुए करते हैं कि क्षेत्र पंचायतें जानबूझकर आडिट कराना नहीं चाहती, ताकि उनका काला चिठठा न खुले। जबकि आडिट कराने के लिए डीएम, सीडीओ और बीडीओ को सैकड़ों पत्र लिखे जा चुके हैं।
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जिला विकास अधिकारी नीरज कुमार श्रीवास्तव कहते हैं कि उन्हें अभी तक आडिटर का एक भी पत्र नहीं मिला। साथ ही उन्होंने आडिट न कराने वाले बीडीओ का वेतन रोकने की बात कही है। वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए हर जिले में जिला लेखा परीक्षा अधिकारी सहकारी समितियां एवं पंचायतें स्थापित है। यह एक स्वतंत्र बाडी है और सीधे एजी से संचालित होती है। जिले में यह संस्था वर्ष 1999 से कार्य कर रही है। इसके अधिकारी बीरेंद्र प्रताप सिंह कहते हैं कि सरकारी धन सही तरीके से खर्च हो इसके लिए आडिट करने की व्यवस्था बनाई गई है। बताया कि जिला पंचायत और सभी 1247 ग्राम पंचायतें बराबर आडिट करा रही है, मगर जिले की 14 क्षेत्र पंचायतें नहीं करा रही है। कहते हैं कि आडिट न कराने वाले को आडिट की भाषा में सरकारी धन का गबन करना कहा जाता है। निदेशक पंचायती राज ने जारी 17 जून 2017 के आदेश में कहा है कि अगर कोई क्षेत्र पंचायत उसके धन का आडिट नहीं कराता है तो उस बीडीओ का वेतन रोक दिया जाए। इसका पालन इसी माह गोरखपुर के सीडीओ कर चुके हैं, उन्होंने सभी बीडीओ का वेतन आडिट कराने तक रोकने का आदेश दे चुके हैं। हर साल क्षेत्र पंचायतों को करोड़ों रुपये विकास कार्यों के मद में दिए जाते हैं। जिला लेखा परीक्षा अधिकार की माने तो क्षेत्र पंचायतों ने बड़े पैमाने पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया है। चूंकि इस खेल में बीडीओ और क्षेत्र पंचायत अध्यक्षों क बराबर की भूमिका रहती है, इस लिए वह आडिट कराना नहीं चाहते। एक सप्ताह पहले क्षेत्र पंचायतों के 34 करोड़ रुपये का हिसाब-किताब न देने के मामले क्षेत्र पंचायतों और विकास भवन की काफी किरकिरी हो चुकी है।
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