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बहाल हो गई जिले में टांडा ग्रिड की आपूर्ति

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बहाल हो गई जिले में टांडा ग्रिड की आपूर्ति
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इलाहाबाद की तकनीकी टीम को मिला श्रेय
बिजली आपूर्ति बहाल होने पर अधिकारियों ने ली राहत की सांस
अमर उजाला ब्यूरो
कुदरहा। नौरहनी घाट पर टांडा ग्रिड के 220 केवी लाइन को बहाल करने में इलाहाबाद की टीम ने सफलता पा ली है। उनकी मेहनत रंग लाई और सोमवार की दोपहर तक तारों को कसने के बाद डैमेज कंडेक्टर के स्थान पर नया कंडक्टर स्थापित कर दिया।
जंफर जोड़ने के बाद लाइन का ट्रॉयल हुआ और इसके बाद आपूर्ति दौड़ा दी गई। इसी के साथ एक माह से बिजली किल्लत झेल रहे उपभोक्ताओं को राहत मिल गई है। बिजली निगम के अधिकारियों ने भी व्यवस्था बहाल होने के बाद राहत की सांस ली। टांडा से जिले ही नहीं मंडल को मिलने वाली विद्युत आपूर्ति तब ठप हो गई जब अचानक नौरहनी घाट के निकट स्थित 220 केवी तार टूट कर सरयू की धारा में गिर गया। माह भर पहले हुई इस घटना के बाद विद्युत संकट खड़ा हो गया। आपूर्ति प्रभावित होने पर गोरखपुर व गोंडा फीडर ने संभाला। तीन टीमों की असफलता से निराश निगम ने इलाहाबाद की कंस्ट्रक्शन कंपनी को बुलाया। कंपनी अपने पश्चिम बंगाल की 35 सदस्यीय टीम के साथ 19 सितंबर को उक्त स्थल पर पहुंची। 20 सितंबर को नदी की धारा के बीच इस टीम ने तकनीकी ढंग से रोप वायर बिछाने में सफलता हासिल कर ली। टूटे हुए तार को धारा से निकालने के बजाय नया तार लगाने का निर्णय लिया गया और दोनों लोड टॉवरों के बीच डैमेज तार को नदी की धारा में गिरा दिया। दोपहर बाद इन दोनों लोड टॉवरों के बीच नया तार लगाने के लिये स्टील रोप वायर वायर बिछाने का कार्य शुरू कर दिया था। 22 सितंबर को खंभों पर तार व कंडक्टर चढ़ाने के लिए नावों के सहारे धारा में दिन भर मशक्कत की गई और तीनों खंभों पर तार चढ़ाने के लिए चार-चार नाव लगाकर उसी पर तार बिछाया गया। इलाहाबाद की शिवशंकर इंटरप्राइजेज लि. के प्रबंध निदेशक सरोज कुमार सुमन ने बताया कि काम जोखिम भरा था, मगर टीम ने बेहद कुशलता से इसका निष्पादन किया। इससे आज लाइन बहाल की गई है। उप खंड अधिकारी सतीश कुमार सिंह, अवर अभियंता सूरज प्रसाद, लाइन मैन राजकुमार और साइड इंचार्ज सुशील कुमार वर्मा पिछले कई दिनों से कैंप कर रहे थे। लाइन जुड़ने के बाद उक्त टीम ने राहत की सांस ली।
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वाह कादिर तेरा जवाब नहीं
नौरहनी घाट के ठेकेदार कादिर खान पिछले कई दिनों से बिजली समस्या दूर करने के लिए जूझ रही टीम के साथ मुस्तैदी से लगे रहे। जब भी टीम को जो जरूरत पड़ी तत्काल स्थानीय स्तर से उस संसाधन को मुहैया करा दिया। एक-दो नहीं बल्कि एक दर्जन से अधिक नाव लेकर वे चौबीस घंटे इस कार्य में सहयोग किए। वे तकनीकी टीम का हौसला बढ़ाते रहे। टीम और अधिकारियों ने शाबाशी दी है।
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लोकल फॉल्ट : जर्जर पोल पर तारों का मकड़जाल
गुल हो जाती बिजली, झेलते हैं उपभोक्ता
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। सरकार ने भले ही जनपद मुख्यालयों को हर हाल में रोस्टर के मुताबिक बिजली मुहैया कराए जाने का फरमान जारी कर रखा है, पर शहर से देहात तक लोकल फॉल्ट बेअसर कर रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि बिजली कब चली जाए कोई ठिकाना नहीं है।
बिजली व्यवस्था ऐसी है कि विभिन्न स्थानों पर जर्जर खंभे, लटकते तार जिम्मेंदारों को मुंह चिढ़ा रहे हैं। इससे लोकल फॉल्ट बढ़ता ही है कभी भी बड़ी अनहोनी हो सकती है। सितंबर में भी अच्छी खासी गर्मी है। धूप और चिपचिपे पसीने से निजात पाने के लिए लोग पंखे या कूलर का सहारा लेते लेकिन लो वोल्टेज से सिर पीटना पड़ता है। लो वोल्टेज से जहां उपकरण डिब्बे बने हैं वहीं टंकी में पानी नहीं चढ़ पा रहा है। कहीं नींद न पूरी होने के चलते लोग चिड़चिड़े हो रहे हैं। घरों में भी 220 वोल्ट की जगह 180 वोल्ट तक बिजली ही मिल पा रही है।
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उपभोक्ताओं की सुनिए
आनंदनगर कटरा के मुन्ना सिंह का कहना है कि बिजली कब आए और चली जाए कोई ठिकाना नहीं रहता। हर माह बिजल भरने के बावजूद भी ये हाल है।
कुदरहा के वीरेंद्र चौधरी ने कहते हैं कि बिजली कटौती का आलम यह है कि धंधा पानी सब चौपट हो गया है। इससे तो अब आजीविका पर भी संकट है।
टेड़िया की उपभोक्ता सुभद्रा देवी व वकील चौधरी ने कहा कि कोई भी टीवी सीरियल पूरा नहीं देख पाते, टीवी बंद ही रहता है, पंखे से तेज हवा नहीं मिलती।
मुख्य अभियंता ने कहा
शहर को 24 घंटे बिजली मुहैया कराए जाने का आदेश है, तकनीकी कमी के चलते 21 या 22 घंटे बिजली की सप्लाई हो रही है, लो वोल्टेज की समस्या जल्द दूर हो जाएगी कई जगह ट्रासफॉर्मर लगाए जाने बाकी है। जर्जर पोल की जगह नए पोल लगाए जाएंगे।
-ओपी यादव, मुख्य अभियंता विद्युत।
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