ओडीएफ के नाम पर करोड़ों का घोटाला
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बस्ती। शहरी क्षेत्र के सभी 25 वार्ड ओडीएफ घोषित कर दिए गए हैं। इनमें जहां 23 सौ शौचालयों का निर्माण करीब-करीब पूरा होने वाला है, वहीं खुले में शौच मुक्त के लिए पालिका ने तमाम योजनाएं बनाई हैं। कुछेक स्थानों पर शौचालयों की कमी को पूरा करने के लिए मोबाइल शौचालय उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा सुलभ शौचालयों को भी फ्री करने पर पालिका काम कर रही है। सूबे के मुख्यमंत्री दो अक्टूबर को प्रदेश को ओडीएफ घोषित करेंगे। शासन का यह फरमान अधिकारियों के सिर चढ़ कर बोल रहा है। डीएम डॉ. राजशेखर की पहल पर काम और तेज हो गया है। डीएम के सख्त तेवर व सक्रियता का परिणाम है कि अधिकारी गांवों में डेरा जमाए हुए हैं। वे हर हाल में 30 सितंबर तक अपने-अपने क्षेत्र को ओडीएफ करने में जुट गए हैं। हालांकि अभी सकारात्मक परिणाम नहीं मिला है, मगर प्रयास जारी है। इधर केंद्र सरकार की टीम ओडीएफ की हकीकत जानने के लिए आने वाली है। इसकी भनक लगते ही जिम्मेदारों के कान खड़े हो गए हैं। नगर पालिका क्षेत्र के सभी वार्डों को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। इसे धरातल पर उतारने के लिए पालिका पूरी ताकत लगाए हुए है।
शहरी क्षेत्र के तीन वार्ड ऐसे हैं, जहां शौचमुक्त घोषित हो जाएंगे। शौचालय का निर्माण भी हुआ है, मगर आज भी कई लोग खुले में शौच जा रहे हैं। इस पर रोक लगाने के लिए पालिका ने जहां शहरी क्षेत्र के उन इलाकों में पांच मोबाइल शौचालय लगवाने की योजना बनाई है, वहीं इसे कार्य को मूर्त रूप देने के लिए ऑर्डर भी दे दिया गया है। इसके अलावा सार्वजनिक शौचालयों को दुरुस्त करा दिया गया है, जबकि सुलभ शौचालयों में निशुल्क व्यवस्था के लिए पास की योजना बनाई है। सभी सुलभ शौचालय पालिका में सूचीबद्ध ऐसे लोगों को पास उपलब्ध कराएंगे जाएंगे, जो अभी भी शौचालय विहीन हैं। इन वार्डों में जागरूकता के लिए सोमवार से सुबह पांच बजे से टीम लाउडस्पीकर से उद्घोषणा करवाएगी। साथ ही टीम वार्ड में ढोल और सीटी लेकर भी घूमेगी। ईओ डॉ. मणि भूषण त्रिपाठी ने बताया कि शहरी क्षेत्र में ओडीएफ के प्रचार के लिए पांच लाउडस्पीकर चलाएंगे जाएंगे। इसके अलावा सुबह पांच बजे से आठ बजे व शाम पांच से रात आठ बजे तक संवेदनशील वार्डों में टीम ढोल व सीटी लेकर लोगों को जागरूकता का पाठ पढ़ाएगी।