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खादो ग्रामोद्योग मंत्री ने बाढ़ का हाल जाना

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खादी ग्रामोद्योग मंत्री ने बाढ़ का हाल जाना
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विक्रमजोत। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने पहुंचे प्रदेश के ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा विभाग के मंत्री सत्यदेव पचौरी ने प्रशासनिक अफसरों से हाल जाना। कल्याणपुर में शुक्रवार दोपहर प्राथमिक विद्यालय में चौपाल लगाई। ग्राम प्रधान और कोटेदार से राहत वितरण की जानकारी ली।
प्रदेश के खादी ग्रामोद्योग, सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम निर्यात प्रोत्साहन मंत्री पचौरी ने सीएचसी प्रभारी राजेंद्र जायसवाल से एंटी लार्वा के छिड़काव सहित दवा वितरण और बीमारी के बाबत पूछताछ की। डॉक्टर ने कोई मरीज न होने और सभी को दवा मिलने का दावा किया। गांव के केशवचंद्र पांडेय ने ग्रामीणों के विस्थापन के लिए दूसरे स्थान पर बसाने के बारे में कहा तो मंत्री ने एडीएम से एक प्लान बनाकर भेजने का निर्देश दिया। बाढ़ प्रखंड के एक्सईएन दिनेश त्रिपाठी ने बांध के बारे में बताया कि कुल 80 करोड़ की योजना थी।10 करोड़ की लागत से10.300 किमी बांध का निर्माण, जिसमें तीन रेग्यूलेटर, 14 स्पर बनाए जाने थे। अभी तक मात्र दो किमी बांध बन पाया है। कल्याणपुर के पास नदी आबादी से सटकर बहने से बांध गांव के बाहर तक ही बन सकने की जानकारी दी। मंत्री ने बात टालते हुए एक प्रस्ताव बना कर भेजने की बात कही। लोकदल के नेता चन्द्रमणि पांडेय ने घाघरा की दो धाराओं के बीच से रेत को हटाकर नदी की धारा पीछे ले जाने की सलाह और 25 बाढ़ प्रभावितों को राहत सामग्री न मिलने की शिकायत की। जिस पर कहा गया कि सूची दीजिए राहत सामग्री बांट दी जाएगी। कहा कि अब सिर्फ फर्जी पात्र ही बचे हैं। मंत्री से मिलने के लिए सैकड़ों की संख्या मतें में महिला-पुरुष जुटे थे मगर मंत्री महोदय बगैर पीड़ितों से मिले व उनकी बात सुने ही आगे चले गए। इस दौरान डीएम अरविंद कुमार सिंह, एडीएम भगवान शरण पटेल, एसपी संकल्प शर्मा, एक्सईएन दिनेश त्रिपाठी, एसडीएम दिनेश कुमार, सहायक अभियंता दयाशंकर सिंह, मकलूराम, जेबीएल श्रीवास्तव, बीडीओ जीतेंद्र प्रताप सिंह सहित तमाम अधिकारी मौजूद रहे।
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कंट्रोल में नहीं कटान
विक्रमजोत। केंद्रीय जल आयोग कार्यालय के मुुताबिक नदी तेजी से घट रही है। जलस्तर खतरे के निशान 92.730 से नीचे 92.460 मीटर पर पहुंच गया है। घटती नदी ने कटान का दायरा बढ़ा दिया है। कल्याणपुर के प्राथमिक विद्यालय व भरथापुर में काली मंदिर के पास जबर्दस्त कटान चल रही है। जबकि सहजौरा पाठक अभी भी चारों ओर पानी से घिरा है। दोआबा भी कटान की चपेट में है। सहजौरा पाठक में कुल 34 घरों की झोपड़ियां इसी वर्ष धारा में समा चुकी हैं जो बचे हैं, वे घर उजाड़कर बंधे पर शरण लिए हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने से दर्जनों गांवों की सब्जी, फसलें और चारे पानी में डूबने से सड़ गए हैं।
बैठे रहे फरियादी, नहीं मिले मंत्री
विक्रमजोत।
पहली बार मंत्री के आने कि खबर पर कल्याणपुर, सहजौरा, भरथापुर के तमाम लोग अपनी फरियाद लेकर घंटों पहले से जमा हो गए। दोपहर करीब 12 बजे डीएम, एसपी के साथ मंत्री पहुंचे तो लोग अपनी बात कहने के लिए घेर लिए। पुलिसवालों ने सभी को समझाकर बैठाया। बमुश्किल 30 मिनट रुकने बाद मंत्री जी चल दिए। अफसरों से ही राहत कार्यों का फीडबैक लिया। इंद्रावती, दाना देवी, विनय, राजेश बजरंगी, रूकमीन, अभिराजी सहित कई महिलाओं का कहना है कि हमें अभी तक बाढ़ राहत वाला न अनाज मिला है सूची में प्रधान और लेखपाल मिलकर हमारे सहित तमाम लोगों का नाम लिखे हैं। शिकायत के लिए आये थे। मगर हमारी तरफ आये बिना ही साहब लोग लेकर चले गये।
मंत्री नहीं मिले, गांव वाले प्रदर्शन किए
दुबौलिया।
चांदपुर, कटरिया बांध का निरीक्षण करने करीब एक बजे बंधे पर प्रदेश के मंत्री पहुंचे। कटान को देखा, जिस पर अधिशाषी अभियंता डीके त्रिपाठी ने बताया कि नदी दो किमी एरिया में वीडी बंधे के करीब कटान कर रही है। मंत्री ने बंधे के कटान को रोकने के लिए स्थायी समाधान निकालने की बात कही। करीब दस मिनट बंधे पर रुके और कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया। बंधे पर शरण लिए खलवा पुरवा, धरमूपुर मुस्तहकम के जग्गू, अनारा, सबलू, रमावती मंत्री से मिलकर अपनी पीड़ा व्यक्त करना चाह रही थी। लेकिन अधिकारियों ने मिलने नहीं दिया। इससे नाराज गांव वालों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया लेकिन मंत्री जी जा चुके थे।
बाढ़ राहत न मिलने की शिकायत
दुबौलिया के देवरागंग बरार के प्रधान मुकेश सिंह से एसडीएम हरैॅया दिनेश कुमार को शिकायती पत्र दिया। बताया कि गांव के काफी लोग बंधे पर शरण लिए हुए है, मगर अधिकांश लोगों को राहत सामग्री नहीं मिली है। गांव के श्रीराम, राम शंकर, हरिराम, शिवराम, राम नरायन, राम सागर, मुन्नर, गनेश, विजय बहादुर, विजय कुमार सहित 25 परिवारों को बाढ़ राहत सामग्री दिलाने की मांग की।
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अफसरों के साथ बाढ़ राहत की समीक्षा की
बस्ती। बाढ़ग्रस्त कल्याणपुर आदि क्षेत्रों का भ्रमण के बाद मंत्री ने आयुक्त सभागार में बाढ़ राहत कार्यों की समीक्षा भी की। मंडलायुक्त दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि मंडल के तीनों जिले बाढ़ प्रभावित हुए थे। राहत के कार्य जनप्रतिनिधि आदि के समन्वय से बेहतर किए गए हैं। राजस्व, चिकित्सा एवं पशुपालन आदि विभागों ने चिकित्सकीय व्यवस्था की। नौ बाढ़ चौकियों पर दो-दो मंडलीय अधिकारी भी तैनात किए गए। डीएम अरविंद सिंह ने राहत कार्यों की जानकारी दी। बताया कि तहसील सदर एवं हर्रैया के लगभग 64 ग्राम प्रभावित थे, जिसमें 2600 परिवार को जनप्रतिनिधियों के समन्वय से समयबद्ध ढंग से राहत सामग्री वितरित की गई। पानी हटने के बाद फसलों की क्षति का आकलन किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधि और प्रशासन बेहतर समन्वय से कार्य किया है। जो संतोष जनक है। फिर भी सजग और सतर्क रहना चाहिए। मुख्यमंत्री जी स्वयं संवेदनशील हैं। किसी भी स्तर पर लापरवाही नही होनी चाहिए। बाढ़ के स्थायी रोक के लिए कार्य योजना बनाने पर भी जोर दिया। खादी ग्रामोद्योग के कार्यों को रोजगार परक और बनाने एंव समूह में उद्योग लगाने की आवश्यकता पर कार्य करने को कहा। सिरका और मुरब्बा के लिए भी व्यावसायिक कार्यो को बढ़ाने और औद्योगिक क्षेत्रों में साफ सफाई के निर्देश दिए। इस दौरान विधायक दयाराम चैधरी, जिलाध्यक्ष भाजपा पवन कसौधन, एडीएम भगवान शरण समेत कई विभागों के अफसर मौजूद रहे।
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