12 दिसंबर 2017 को अनुबंध समाप्त होने से फंस गए थे
प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री समेत जिम्मेदारों से लगाई थी गुहार
अमर उजाला ब्यूरो
कप्तानगंज। रोजी रोटी की तलाश में दुबई में एक वर्ष से फंसे कप्तानगंज के ध्रुवचंद सोमवार को घर पहुंच गए। देखकर मां बाप की आंखें छलक गईं।
जसईपुर के ध्रुवचन्द्र 12 मई 2017 को मुंबई की किसी कंपनी के माध्यम से यूएई में रोजगार के लिए आठ महीने के अनुबंध पर गए थे। 12 दिसंबर 2017 को अनुबंध समाप्त हो गया जिसके बाद जहाज के परिचालन पर प्रतिबंध लग गया। वापसी के बजाय वह जहाज में 22 भारतीय युवकों से साथ फंसे रहे। धुव्र ने फंसने की जानकारी विदेश मंत्री सहित अन्य जिम्मेदारों को ट्वीटर के माध्यम से भेजी थी। ध्रुव की पत्नी लखनऊ में स्टाफ नर्स है तो भाई प्रेमचन्द दिल्ली में पढाई करता है। पिता राम देव व माता घर पर रहती हैं।परिवार को भी वीडियो कॉलिंग से खुद को जहाज में फंसे होने की जानकारी दी थी। परिवार ने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से मिलने की कोशिश की लेकिन सारा प्रयास विफल रहा। ध्रुव ने बताया कि मीडिया खबरों को भारत के विदेश मंत्रालय ने संज्ञान में लिया। फंसे लोगों से मुलाकात करने इंडियन एंबेसी के वाइस काउंसलर विभाकांत शर्मा, फ़ेडरल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के कैप्टन अब्दुल्ला अल हय्यास, मिशन टूसी फेरर के एंडी बावर मैन(रीजनल डायरेक्टर साउथ एशिया) पहुंचे और अफसरों के प्रयास से भारत आने का रास्ता साफ हुआ।
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अमर उजाला का आभार जताया
धुव्र चन्द्र अपनों के बीच पहुंचे तो आंखे भर आई। उनकी आप बीती सुन लोगों के रोंगटे खडें हो गए। कहना था कि 22 युवकों के फंसे होने की खबर को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। पूरा परिवार अमर उजाला परिवार का आभारी है। मुश्किल की घड़ी में परिवार और मेरा साथ दिया। बताया कि अनुबंध खत्म होने से एक वर्ष से पानी की जहाज में फंसा था कारण कि जहाज के परिचालन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। वतन वापसी के लिए विदेश मंत्री, प्रधानमंत्री सहित अन्य जिम्मेदारों को ट्रवीट कर गुहार लगाई थी।