बिना नीर, बढ़ रही शहरवासियों की पीर
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बभनान। कस्बे के पीएचसी पर शुद्ध पानी का संकट खड़ा हो गया है। अस्पताल पर वाटर कूलर बेमतलब हो गए हैं। यही नहीं जलापूर्ति के लिए बने ओवरहेड टैंक सूख गए हैं। हैंडपंप दूषित जल उगल रहे हैं। मरीज व तीमारदारों के लिए बोतल बंद पानी के जेब ढीली करनी पड़ रही है।
बभनान अस्पताल वर्तमान में दुर्व्यवस्था का शिकार है। यहां की स्थिति यह है कि डॉक्टर व दवा का अभाव तो लोग झेल ही रहे हैं। शुद्ध पेय जल का भी संकट है। बरसों पहले मरीजों व तीमारदारों के लिए अस्पताल पर पानी की टंकी से लेकर पाइप लाइन बिछवाया गया था लेकिन वर्तमान में पाइप सहित टोटियां उखड़ गई हैं। अस्पताल पर लगा हैंडपंप भी दूषित जल उगल रहा है, जिससे मरीजों सहित तीमारदारों को शुद्ध जल के लिए भटकना पड़ रहा है। यहां के राजेश सिंह, कृपा शंकर, राजमणि, देवेंद्र, पंकज कुमार, रविनंदन आदि का कहना है कि दुर्व्यवस्था के चलते यह अस्पताल अपनी उपयोगिता खोता जा रहा है। पीएचसी के चिकित्साधिकारी जेपी पांडेय का कहना है कि मोटर खराब होने व टोटियों के उखड़ने की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गयी है। पानी की किल्लत दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
शुद्ध पेयजल मुहैया कराने में योजनाएं विफल
बहादुरपुर। गर्मी शुरू होते ही ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल का संकट गहराने लगा है। लोगों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। पर्याप्त मात्रा में शुद्ध पानी न मिल पाने के कारण लोगों को पुराने कूप, हैंडपंप एवं तालाब याद आने लगे हैं।
एक तरफ सरकार जहां लोगों को शुद्ध पेयजल के उपयोग पर जोर दे रही है, इसके लिए नई नई योजनाएं चला रही है। वही ग्रामीण क्षेत्रों में लगे अधिकांश इंडिया मार्का हैंडपंप या तो सालों से बंद पड़े हैं अथवा दूषित पानी उगल रहे हैं। लेकिन जिम्मेदार इस मुद्दे पर कोई पहल नहीं कर रहे हैं। कई जगह तो विभागीय उदासीनता के चलते मजबूर होकर ग्रामीणों ने स्वयं के खर्चे से इंडिया मार्का हैण्डपंप के बगल देशी हैंडपंप लगा लिए हैं। बहादुरपुर ब्लाक के अधिकांश ग्राम पंचायतों में इंडिया मार्का हैंडपंपों की स्थिति बेहद खराब है।