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दहेज हत्या में पति सहित तीन को 10-10 वर्ष का कारावास

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दहेज हत्या में पति सहित तीन को 10-10 साल का कारावास
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जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सुनाया फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव गोयल की अदालत ने दहेज हत्या के जुर्म में दोषी करार देते हुए पति सहित तीन को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक पर 20-20 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। इसे न अदा करने पर छह छह माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी परिपूर्णानंद पांडेय ने कोर्ट में घटना का विवरण रखा। बताया कि वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के मझौवा खुर्द निवासी राम प्रकाश ने अपनी बेटी सावित्री देवी की शादी मुंडेरवा थाना क्षेत्र के दसौटी गांव में विष्णु कुमार के बेटे दारा सिंह चौहान के साथ 25 मई 2014 को की थी। हैसियत के मुताबिक दान दहेज देकर बेटी की विदाई की थी। कुछ दिन सब कुछ ठीक रहा। उसके बाद दहेज में ससुराल वाले भैंस, चेन, अंगूठी की मांग को लेकर प्रताड़ित करने लगे। इस बात की शिकायत सावित्री अपने पिता से करती थी। सात जुलाई 2016 को ससुराल से राम प्रकाश के पास फोन आया कि उसकी लड़की की तबीयत बहुत खराब है। आकर देख लें। सूचना पर तत्काल भतीजे धर्मेंद्र के साथ दसौटी गए, जहां लड़की का शव रखा हुआ था। राम प्रकाश ने मुंडेरवा पुलिस को तहरीर दी कि ससुराल में पति, सास सोना देवी, ससुर व जेठानी साधना ने मिलकर उसके बेटी की गला दबाकर हत्या कर दी है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया। विवेचना के बाद चारों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल हुआ। अभियोजन की तरफ से वादी मुकदमा सहित नौ गवाहों के बयान हुए। बचाव पक्ष से कहा गया कि सावित्री ने स्वयं आत्महत्या की है। और झूठा फंसाया गया है। मेडिकल रिपोर्ट में दम घुटने से मौत की पुष्टि हुई। गवाहों के बयान व सबूतों के आधार पर न्यायाधीश ने दारा सिंह चौहान, विष्णु कुमार, सोना देवी को दोषी मानते हुए उक्त सजा सुनाई। जबकि साक्ष्य के अभाव व संदेह का लाभ देकर जेठानी साधना देवी को दोष मुक्त कर दिया।
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धोखाधड़ी में मुकदमा दर्ज करने का आदेश
नाम बदलकर नौकरी करने का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रदीप कुमार राम ने कागजात में हेराफेरी व धोखाधड़ी के मामले में नौकरी कर रहे एक व्यक्ति पर मुकदमा दर्ज कर विवेचना का आदेश थाना लालगंज को दिया है। अनुपालन आख्या भी तलब की है।
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लालगंज थाना क्षेत्र के कड़सरी मिश्र गांव के मनोज कुमार ने गांव के ही सुशील कुमार के खिलाफ कोर्ट में अर्जी दी। बताया कि सुशील कुमार ने वर्ष 2004 में शीतला प्रसाद पुत्र सुभाषचंद्र के नाम से शारदा सरस्वती बालक बालिका इंटर कॉलेज धढ़ढौरा बानपुर से हाई स्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। फिर अपना नाम बदलकर वर्ष 2011 में आरपीएचएस स्कूल अमरौना मेहनौना से सुशील कुमार के नाम से परीक्षा देकर पास किया। मतदाता सूची व परिवार रजिस्टर में सुशील कुमार का नाम शीतला प्रसाद दर्ज है। बाद में परिवार रजिस्टर में शीतला प्रसाद का नाम काटकर सुशील कुमार दर्ज कराकर नौकरी किए जाने की बात कही गई। प्रकरण की गंभीरता व साक्ष्य संकलन की आवश्यकता प्रतीत होने पर सीजेएम ने मुकदमा दर्ज कर विवेचना का आदेश दिया है।
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