बस्ती। अक्तूबर माह बीतने को है और पारा भी लुढ़क रहा है। दिन में तो गनीमत रहती है, लेकिन दिन ढलने के बाद हवाएं शरीर में सिहरन पैदा कर रही हैं, ऐसे में जरा सी असावधानी बच्चों और बुजुर्गों की सेहत को मुसीबत में डाल सकती है।
बदलते मौसम में सबसे अधिक समस्या बुजुर्गों व बच्चों को होती है, क्यों कि इनमें इन्यूमिनिटी कम होती है, जिसके चलते ये आसानी से बीमारी की जद में आ जाते हैं। ऐसे में इनकी विशेष देखभाल की जरूरत होती है।
डॉ. तय्यब अंसारी कहते हैं कि ठंड के मौसम में सबसे अधिक खतरा बुजुर्गों में फालिज का होता है। ऐसे में इनके परिजनों को चाहिए कि वे उन्हें गर्म कपड़े पहनाएं और रात में घर के बाहर कम निकलने दें। साथ ही उन्हें ठंडे पानी की जगह हल्का गुनगुना पानी पीने के लिए दें। चिकित्सक ने बच्चों को लेकर कहा कि इनमें कोल्ड डायरिया व निमोनिया का खतरा सबसे अधिक रहता है, इसे वजह से उल्टी दस्त व तेज बुखार आता है, साथ ही बच्चों को सांस लेने में भी तकलीफ होती है, यदि इस तरह के लक्षण दिखे तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं, लापरवाही न बरतें।
पारे एक नजर
अधिकतम न्यूनतम
24 अक्तूबर 34.4 डिग्री सेल्सियस 18.4 डिग्री सेल्सियस
25 अक्तूबर 33.0 डिग्री सेल्सियस 17.0 डिग्री सेल्सियस
26 अक्तूबर 35.0 डिग्री सेल्सियस 16.0 डिग्री सेल्सियस
27 अक्तूबर 34.0 डिग्री सेल्सियस 16.0 डिग्री सेल्सियस
28 अक्तूबर 33.4 डिग्री सेल्सियस 17.6 डिग्री सेल्सियस
अस्पतालों में ओपीडी का हाल
जिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब नौ सौ की ओपीडी हो रही है। सबसे अधिक बच्चे और बुजुर्ग मरीजों की संख्या है। जिला अस्पताल के डॉक्टर आशीष त्रिपाठी बताते हैं कि ज्यादातर बच्चे वायरल फीवर से प्रभावित हैं, कुछ को निमोनिया है व कुछ कोल्ड डायरिया की जद में। अधिकतर बुजुर्ग अस्थमा से पीड़ित आ रहे हैं, इनकी संख्या सौ तक पहुंच रही है। डॉक्टर के मुताबिक सर्दी में यह समस्या बढ़ जाती है, साथ ही मौसम के बदलाव पर भी। वहीं महिला चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ. पीके ने बताया कि प्रतिदिन लगभग चार से के करीब ओपीडी हो रही है, जिसमें महिलाएं व बच्चें शामिल हैं।