गांधीनगर: अतिक्रमण, अवैध पार्किंग से बढ़ीं दुश्वारियां
नगर पालिका और प्रशासन भी औपचारिकता तक ठहरा
10 मिनट की जगह आधे घंटे में पहुंचते हैं रोडवेज, रेलवे स्टेशन
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। हार्ट ऑफ सिटी यानी गांधीनगर अतिक्रमण से कराह रहा है। दोपहर के बाद ठेलेवाले पटरियों पर आ जाते हैं तो पार्किंग बीच सड़क पर। शाम होते-होते स्थिति गंभीर हो जाती है। पालिका और प्रशासन के तमाम प्रयास इस औपचारिकता से आगे नहीं बढ़ सके हैं।
मुख्य सड़क के दोनों किनारों पर नगर पालिका ने आठ से 10 फिट तक का फुटपाथ छोड़ रखा है। जिसके बाद बड़ी बड़ी दुकानें और प्रतिष्ठान हैं। खास बात यह कि कहीं भी पार्किंग की व्यवस्था है ही नहीं। पटरी दुकानदारों की मानें तो हर दिन इसका किराया देते हैं। किराया किसे देने के नाम पर चुप हो जाते हैं। एक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पटरी पर अपनी दुकान लगाते हैं तो जिसके सामने होगी उसे ही देते हैं। ऐसे में लंबे समय से पालिका की पटरी को किराए पर उठाने का काम बेरोकटोक जारी है। पटरी दुकानदार के मुताबिक दुकानों के सामने खड़े होने की कीमत दो से पांच सौ रुपये तक है। यही नहीं जब कभी पालिका अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाती है तो इसी प्रतिष्ठान के जिम्मेदार पटरी दुकानदारों का सामान आदि रखवाने की व्यवस्था भी कर देते हैं। जब एक दो दिन बाद अतिक्रमण हटाओ अभियान रुक जाता है तो फिर हालात जस के तस हो जाते हैं। यह क्रम कोई एक दो दिन से नहीं बल्कि वर्षों से चल रहा है, लेकिन आज तक इसके खिलाफ किसी ठेला या रेहड़ी वाले ने आवाज नहीं उठाई। नगर पालिका परिषद के ईओ डॉ. मणिभूषण त्रिपाठी ने कहा कि अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया जाता रहता है। अवैध वसूली की जानकारी नहीं है। दुकानदार ऐसा कृत्य कर रहे हैं तो इसकी जांच कराकर ऐसे लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। नगर पालिका अध्यक्ष रूपम मिश्र का कहना है कि अवैध पार्किंग बड़ी समस्या है। इस समस्या से निपटने के लिए पालिका प्रशासन प्रयासरत है। रोडवेज के पास एक स्थान को चिह्नित किया गया है जिसके लिए रोडवेज अधिकारियों से बातचीत भी हुई है। दूूसरा गांधीनगर में चिह्नित किया गया है लेकिन प्रक्रिया अभी शुरू हुई है इस लिए समय जरूर लेगा। यह भी निश्चित है कि इस समस्या से निजात दिलाया ही जाएगा।