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1565 हैंडपंप दे रहे हैं दूषित पानी

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बस्ती। जिले के 1565 इंडिया मार्का हैंडपंप पिछले काफी दिनों से दूषित पानी दे रहे हैं। इनमें सौ से अधिक हैंडपंप सरकारी स्कूलों के खराब हैं। जलनिगम की रिपोर्ट के मुताबिक इन हैंडपंपों को रिबोर करने की आवश्यकता है। इसके लिए चार करोड़ 38 लाख 20 हजार रुपये की आवश्यकता है। सीडीओ अरविंद कुमार पांडेय ने बताया कि नये नियम के तहत ग्राम पंचायतों में खराब होने वाले हैंडपंपों के मरम्मत से लेकर रिबोर तक के कार्य ग्राम निधि से होगा। पहले यह कार्य जलनिगम के जिम्मे था। बताया कि सभी बीडीओ को ग्राम निधि से हैंडपंप को रिबोर कराने के आदेश दिए गएं हैं। साथ ही किन-किन ब्लॉक क्षेत्र में कितने हैंडपंप रिबोर करने लायक है इसकी जानकारी मांगी गई है।
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सरकारी व्यवस्था का खामियाजा ग्रामीण क्षेत्र के लोग और स्कूली बच्चों को उठाना पड़ रहा है। इस नई वित्तीय वर्ष से जब से हैंडपंपों के मरम्मत और रिबोर करने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को दी गई, तब से एक भी हैंडपंप रिबोर नहीं हुए। कई पंचायतों को तो अभी तक इस नई व्यवस्था की जानकारी ही नहीं है। जिसको है भी वह इसमें रुचि नहीं ले रहे हैं। रिबोर न होने से सबसे अधिक नुकसान स्कूली बच्चों और उनके अभिभावकों को उठाना पड़ रहा है। स्कूल के हेड मास्टर से लेकर खंड शिक्षा अधिकारी और बीएसए से दूषित पानी देने की रिपोर्ट कर रहे हैं, मगर कोई कार्रवाई नहीं होती। सीडीओ ने बताया कि ग्राम पंचायतें चाहे तो रिबोर कार्य खुद अपने संसाधन से करा सकती है। अगर कोई नहीं कराना चाहता तो वह जल निगम से करवा सकता है, इसके लिए उसे ग्राम निधि प्रथम से 28 हजार रुपये देना होगा। एक प्रधान का कहना है कि प्रधान और सेक्रेटरी रिबोर कराने में धन नहीं व्यय करना चाहती, क्यों कि इसमें उन्हें कमीशन नहीं मिलेगा। पंचायतें वहीं कार्य कराने में रूचि रखती है जिनमें उन्हें आर्थिक लाभ होता है।
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