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फैसले के बाद आंदोलित हुए शिक्षा मित्र

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फैसले से खफा शिक्षामित्र आंदोलित
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बस्ती।
सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय आने के बाद बुधवार को शिक्षामित्रों, समायोजित शिक्षकों का आक्रोश केंद्र और प्रदेश सरकार पर फूट पड़ा। शिक्षामित्रों का आरोप है कि भाजपा नेताओं ने झूठा आश्वासन देकर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में सहयोग तो ले लिया किन्तु उनके प्रकरण की सर्वोच्च न्यायालय में बेहतर पैरवी नहीं हुई। केंद्र और प्रदेश की कार्यशैली से नाराज शिक्षकों ने जमकर मोदी, योगी और अमित शाह के विरोध में नारेबाजी की। शिक्षकों ने इन सभी को धोखेबाज करार दिया।
बुधवार को कार्यालय पर हजारों की संख्या में जुटे शिक्षामित्रों, समायोजित शिक्षकों ने बीएसए कार्यालय में तालाबंदी कर सभा की। प्रदर्शन करते हुए डीएम कार्यालय पहुंचकर दो सूत्री मांग पत्र मुख्यमंत्री को भेजा। ज्ञापन में उत्तर प्रदेश सरकार से शिक्षक नियमावली में संशोधन कर सहायक अध्यापक पद पर बनाए रखने और समान कार्य के लिए समान वेतन तत्काल प्रभाव से लागू रखने की बात कही गई। धरने का नेतृत्व करते हुए शिक्षक नेता उदयशंकर शुक्ल, चन्द्रिका सिंह ने कहा कि जब तक प्रदेश सरकार का कोई सकारात्मक निर्णय नहीं आ जाता, जनपद के परिषदीय जूनियर एवं प्राइमरी विद्यालय अनिश्चित काल तक के लिए बंद रहेंगे। शिक्षामित्र और अध्यापक विद्यालय बंद कर बीएसए कार्यालय पर धरना देंगे। शनिवार को भाजपा के सांसद, विधायक, जन प्रतिनिधियों का घेराव करने का निर्णय हुआ। आदर्श समायोजित शिक्षक, शिक्षा मित्र वेलफेयर एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ की ओर से आयोजित धरने को उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ पदाधिकारियों, शिक्षकों ने भी अपना समर्थन दिया। शिक्षक नेता उदयशंकर शुक्ल और चंद्रिका सिंह ने कहा कि शिक्षामित्रों के साथ केंद्र, प्रदेश सरकार ने विश्वासघात किया। कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया तय करना सरकार का काम है शिक्षामित्रों का नहीं। प्रदेश सरकार तत्काल शासनादेश जारी कर पूर्व की स्थिति बहाल करे। सभा को आनन्द दूबे, राम विलास चौधरी, प्रवीण श्रीवास्तव, मुक्तेश्वर यादव, रजनीश मिश्र, वीरेन्द्र शुक्ल, गिरजेश दूबे, राम पराग चौधरी, प्रदीप दूबे, विजय बहादुर यादव अभय सिंह यादव, शैल शुक्ल, विशाल शुक्ल, उमाशंकर मणि त्रिपाठी, राजेश गिरी सहित अन्य ने भी संबोधित किया। आंदोलन में राम प्रकाश वर्मा, लालजी चौधरी, रत्नेश चौधरी, सुशीला देवी, राघवेन्द्र उपाध्याय, सुनील तिवारी, अभिषेक सिंह, जगजीवन, संदीप सिंह, प्रदीप, राजकुमार, विश्वभरनाथ दूबे, प्रदीप चौहान, रजनीश पाण्डेय, रफीक अहमद, मिथलेश मिश्र, इन्द्रावती, बीना उपाध्याय, पूनम यादव, वंदना पाल के साथ ही हजारों की संख्या में शिक्षक, शिक्षामित्र उपस्थित रहे।
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शिक्षकों को आदेश का सम्मान करना चाहिए : डीएम
शिक्षकों के आंदोलित होने पर डीएम अरविंद सिंह ने कहा कि सभी को देश के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने बताया कि दो दिन के लिए समायोजन प्रक्रिया को शिथिल कर दिया गया है।
आंदोलन करने का निर्णय शिक्षकों का
बीएसए सत्येंद्र सिंह ने कहा कि सभी शिक्षकों को कोर्ट के निर्णय का सम्मान करना चाहिए और अपनी बातों को संवैधानिक तरीके से ज्ञापन के जरिए कहना चाहिए। बताया कि अभी तक उन्हें इस मामले में शासन से कोई आदेश एवं निर्देश नहीं मिला है।
120 स्कूल हो जाएंगे बंद
शिक्षकों के आंदोलित होने से जिले के लगभग 120 स्कूल बंद हो जाएंगे। बीएसए ने बताया कि जिन शिक्षकों का समायोजन किया गया, उनमें शिक्षामित्र भी शामिल हैं। परशुरामपुर में सबसे अधिक 18 ऐसे स्कूल हैं जो बुधवार से ही बंद हो गए। इसी तरह दुबौलिया में भी सात स्कूल हैं, जो बंद हो गए। प्रशासन और विभाग के सामने सबसे बड़ी परेशानी उन एकल विद्यालयों का संचालन करना है, जहां पर सिर्फ शिक्षामित्र ही तैनात हैं।
शिक्षामित्रों ने बयां की पीड़ा
दुबौलिया ब्लॉक के हरिपालपुर में सहायक अध्यापक रहे शिवकुमार चौधरी ने बताया कि अब सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से निराश हुई है। 17 साल तक सेवा देने के बाद जब उम्मीद को पंखे लगे ही थे कि कोर्ट के निर्णय से एक झटके में खत्म कर दिया।
सेमरा मुस्तहकम में शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक रहे चंद्रेश तिवारी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से हताशा मिली है। इतने धरना प्रदर्शन के बाद नौकरी पक्की हुई थी। मगर निकाले जाने से अपने और परिवार के भविष्य पर संकट कर खड़ा कर दिया है।
गौर क्षेत्र पड़री विद्यालय में तैनात महेंद्र कुमार ने बताया कि शिक्षक की नौकरी के लिए बड़ी तपस्या की थी। स्कूल में हमेशा ईमानदारी से बच्चों को पठन, पठान का कार्य कराया। उसके बाद नौकरी से हाथ धौने के बाद मन बहुत दुखी है। अभी भी आस लगाया हूं कि कुछ हल निकलेगा।
चिलमा द्वितीय में तैनात रहे प्रदीप कुमार पांडेय ने बताया कि शिक्षामित्र से पूर्ण शिक्षक बनने में पपड़ बेलना पड़ा। बीए, दो वर्षीय बीटीसी कोर्स करने के उपरांत समायोजित हुआ। अभी घर गृहस्थी संभाल रहा था कि अचानक न्यायालय के निर्णय ने जीवन में मुश्किलें खड़ी कर दी।
हर्रैया प्राइमरी स्कूल की माया चौधरी कहती हैं कि इस निर्णय से उनके परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट हो गया। बच्चों की पढ़ाई अधर में पड़ जाएगी। कहा कि इतने सालों तक नौकरी करने के बाद उन्हें यह सिला मिलेगा इसकी उम्मीद उन्होंने कभी नहीं की थी।
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ओड़वारा प्राथमिक विद्यालय की अंकिता मिश्रा ने कोर्ट के निर्णय से इतना व्यथित थी कि उनकी समझ में नहीं आ रहा था, वह क्या बोलें, बस इतना कहा कि केंद्र और राज्य सरकार ने उनके साथ अच्छा नहीं किया।
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