ऑडिट से खुली प्रधान, सेक्रेटरियों की पोल
बस्ती।
प्रधान और पंचायत सेक्रेटरी ग्राम निधि प्रथम के धन को निजी संपत्ति के रूप में उपयोग कर रहे हैं। इस मद में हर साल ग्राम पंचायतों को करोड़ों रुपये दिए जाते हैं मगर उसका अधिकतर इस्तेमाल विकास के बजाए दुरुपयोग करने में किया जाता है। दो दिन पहले हुई ऑडिट ने जिस तरह इस मद के धन की बंदरबांट का खुलासा किया है, उससे धन के सही और गलत इस्तेमाल होने का पता चलता है। सिर्फ दो ग्राम पंचायतों में लगभग 19 लाख रुपये के गोलमाल सामने आया। इससे पहले कई बार इस तरह के मामले प्रकाश में आ चुके हैं।
शासन और प्रशासन सहित पंचायती विभाग को सबसे अधिक ग्राम निधि प्रथम के धन के दुरुपयोग की शिकायतें मिलीं। एक आंकड़े के मुताबिक बीते वित्तीय वर्ष में इस तरह के पांच सौ से अधिक मामलों की जांच हुई और लगभग 60 करोड़ रुपये के दुरुपयोग का खुलासा हुआ। कई प्रधानों और सेक्रेटरियों ने बताया कि इसके लिए सिर्फ प्रधान और सेक्रेटरी ही जिम्मेदार नहीं हैं बल्कि क्षेत्र पंचायतें और पंचायत विभाग भी उतना ही दोषी है। जो बिना सुविधा शुल्क लिए कोई काम नहीं करती। एक प्रधान ने बताया कि अगर कसी प्रधान ने ईमानदारी दिखाने की हिम्मत की तो क्षेत्र पंचायतों ने उसकी इतनी जांच करा दी कि उसे परेशान होकर सरेंडर करना पड़ता है। बिना सुविधा शुल्क लिए जेई एमबी नहीं बनाता, अगर सुविधा शुल्क दे दिया तो बिना मौके पर गए जेई एमबी बना देता है। ब्लॉक रामनगर की ग्राम पंचायत चंदोखा और कप्तानगंज के ग्राम पंचायत पिलखांव में दो दिन पहले जिला लेखा परीक्षा अधिकारी 18.35 लाख के गबन को पकड़ा और रकम की वसूली प्रधान और सेक्रेटरी से कराने के लिए लिखा। इस मामले में विकास भवन के अधिकारी कुछ भी कहने से कन्नी काट रहे हैं।