कभी था शान सीतापुर आंख अस्पताल, आज खंडहर
आंख के अस्पताल में हर दिन होती थी 500 ओपीडी
वेतन मिला नहीं और सेवानिवृत्त हो गए कर्मचारी
राज प्रकाश
बस्ती। नेत्र रोगियों के लिए जिले में स्थापित सीतापुर आंख अस्पताल उपेक्षा का शिकार होने से खंडहर में बदल गया। भवन गिर रहा है, और उपकरण तक गायब हो गए हैं। 1975 में स्थापित यह नेत्र चिकित्सालय कभी जिले का शान हुआ करता था। इस अस्पताल के संचालन की जिम्मेदारी बस्ती डिस्ट्रिक्ट आई रिलीफ सोसाइटी की थी। पदेन अध्यक्ष डीएम व सचिव सीडीओ हुुआ करते थे।
वर्ष 1954 में नेत्र रोगियों के उपचार के लिए सीतापुर आंख अस्पताल की नींव रखी गई। इस दौर में गिने-चुने ही अस्पताल होते थे। इस वजह से लोगों की भी खुशी का ठिकाना नहीं था। भारी-भरकम रकम उस समय खर्च कर एक बड़ी इमारत बनाई गई थी। दो अक्तूबर 1975 को गांधी जयंती के दिन बस्ती के तत्कालीन जिलाधिकारी चंद्रभूषण धर द्विवेदी ने इस चिकित्सालय का शिलान्यास किया था। महज दो वर्ष बाद 20 फरवरी 1977 को इस अस्पताल के सामान्य कक्ष का उद्घाटन उत्तर प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य एवं न्याय मंत्री रहे प्रभुनारायण सिंह ने किया था। अस्पताल को आम लोगों के लिए खोल दिया गया। वार्ड ब्वॉय व चौकीदार रहे लगभग 72 वर्षीय रामऔतार ने बताया कि हर दिन यहां पांच सौ मरीजों की ओपीडी होती थी। हर माह लगभग 40 लोगों के नेत्रों का सफल ऑपरेशन किया जाता था। औतार बताते हैं कि यहां कुल नौ का स्टाफ था, जिसमें एक डॉक्टर, एक फार्मासिस्ट, ड्रेसर, वार्ड ब्वॉय, क्लर्क, स्वीपर, दाई व माली की तैनाती थी। अस्पताल के बंद होने व जर्जर हालत को लेकर बताया कि वर्ष 2005 में यहां तैनात एक चिकित्सक की गलती से कई लोगों की आंखें खराब हो गई थी, इसके बाद से यह अस्पताल टूटता चला गया और आज इस स्थिति में पहुंच गया है।
1997 में अस्पताल संचालन को मांगा था सहयोग
बस्ती में जिलाधिकारी व सोसाइटी अध्यक्ष रहे हेमंत राय 22 नवंबर को 1997 को अपील की थी कि सीतापुर आंख अस्पताल की बस्ती शाखा जनपद का गौरव है। बस्ती के साथ ही अन्य जनपदों के आंख के रोगियों की यहां चिकित्सा सेवा होती आ रही है। यह चिकित्सालय घोर आर्थिक संकट में है। चिकित्सा उपकरण पुराने हो चुके हैं। भवन की स्थित भी ठीक नहीं है। कर्मचारियों के नियमित वेतन भुगतान का अभाव है। ऐसे में जनपदवासियों, गणमान्य नागरिकों व उद्योगपति आर्थिक रूप से अस्पताल संचालन में मदद करें।
गायब हो गए लाखों के उपकरण
जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते इस अस्पताल में लगे लाखों रुपये के उपकरण गायब हो गए। साथ ही खिड़की, जंगले दरवाजों तक को नहीं छोड़ा गया। सूत्रों में मानें तो 12 कीमती आलमारियों के साथ ही भवन में लगे पंखे भी यहां से चोरी हो गए। देेख-रेख के अभाव में भवन का कई हिस्सा जगह-जगह से गिर गया है। आर्थिक तंगी से इस आंख अस्पताल में तैनात कई कर्मी ऐसे हैं, जिन्हें धनाभाव में चलते कई माह का वेतन तक नहीं दिया जा सका, इनमें ज्यादा तर कर्मचारी सेवनिवृत्त भी हो गए हैं, इन्हीं कर्मचारियों में से एक हैं रामऔतार जो आज भी वेतन मिलने की आस लगाए हैं।
इनकी सुनिए
सीतापुर आंख अस्पताल के सलाहकार डीके शर्मा से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि हम चाह रहे हैं कि अस्पताल चले। यह बस्ती का गौरव भी था, लेकिन यह तब संभव है जब लोकल समिति सहयोग करे। शर्मा ने बताया कि इसके लिए कई बार पत्र भी लिखा गया, लेकिन सब सिफर रहा।