बस्ती। रोडवेज के सहारे यदि समय से मंजिल पर पहुंच जाते हैं तो आप खुश नसीब हैं। प्रशिक्षित मैकेनिकों के अभाव के चलते बसों की समुचित जांच नहीं हो पा रही है, जिससे बस रास्ते में ही दगा दे जाती है। सबसे बुरा हाल ग्रामीणांचल के रूटों की बसों की है। क्योंकि वर्कशॉप में 120 स्टॉफ की जगह महज 30 लोग ही बचे हैं।
कस्बों तक यात्रियों की सुविधा के लिए परिवहन विभाग विभिन्न रूटों पर बसों का संचालन कर रहा है। कुल 35 बसें स्थानीय कस्बों के लिए चलाई जा रही हैं। डुमारियागंज-सोनहा मार्ग पर 10 तो डुमारियागंज-बढ़नी मार्ग पर भी इतनी ही संख्या में रोडवेज की बसें संचालित की जा रही हैं जो इटवा तक चलती हैं। इसी तरह बस्ती-बांसी मार्ग पर जाने के लिए 10 बसें नियमित चलाई जा रही हैं। महसो-महुली मार्ग पर एक और तीन बसें गोरखपुर रोड पर दौड़ती हैं। जबकि महसों से फैजाबाद के लिए भी एक बस नियमित चल रही है। यात्रियों की संख्या को देखते हुए परिवहन विभाग ने सभी प्रमुख मार्गों पर बस की सुविधा दे रखा है, लेकिन इन बसों से यात्रा करना उतना आसान नहीं जितना की देखने से लगता है। क्योंकि रास्ते में ही बस में खराबी आ जाने के कारण अधिकतर देरी से पहुंच रही हैं। बसों की हालत यह है कि शीशे टूटे हुए हैं। जो सही सलामत है, वह जाम हैं। यात्रियों का कहना है कि खराब टायर जर्जर सड़कों को झेल नहीं पाने से पंक्चर हो जाते हैं। यदि कहीं बस बंद हो गई तो धक्का लगाकर र्स्टाट कराना मजबूरी है। प्रतिदिन शहर आने वाले यात्रियों का कहना है कि रोडवेज बसों से यात्रा करना बहुत कठिन हो गया है। बस्ती से टांडा के लिए बस का इतंजार कर रहे अजय राय ने बताया कि एक घंटे से अधिक हो गए हैं। बस का इंतजार है, लेकिन डिपो में अभी तक बस नहीं पहुंची है। जिससे लोग परेशान हैं। इस गर्मी में तो बस में बैठने के बाद भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, लेकिन मजबूरी है कि प्राइवेट साधन आधी दूरी तक ही ले जाते हैं। बस्ती से गोरखपुर जा रहे पुष्पेंद्र ने बताया कि बस हमेशा देर में आती है जिससे बहुत समस्याएं होती हैं। बस का इतंजार कर रहे विजय ने बताया कि लोगों को अंबेडकरनगर जाना है पर अभी तक बस नहीं मिली जबकि एक बजे आने का समय है और डेढ़ बज गए हैं।
मैकेनिक नहीं होने से है समस्या: इंचार्ज
रोडवेज के इंचार्ज जय गोविंद सिंह कहते हैं कि डिपो में मैकेनिकों की भारी कमी है। 120 में सिर्फ 30 लोग ही हैं। जो बसों की चेकिंग करते हैं। दूसरे कब पंक्चर हो जाए, कहा नहीं जा सकता है। फिर भी डिपो उपलब्ध संसाधनों से अच्छी सेवा दे रहा है और आगे सुविधाओं का प्रयास भी है। स्थानीय स्तर पर इस समय 35 बसें संचालित की हो रही हैं।
फिट बसें ही जाती हैं रोड पर: सहाय
रोडवेज के सीनियर फोरमैन इंचार्ज अजय सहाय का कहना है कि डिपो में वर्तमान में 120 के सापेक्ष 30 का ही स्टॉफ है, लेकिन बस सेवा पर इसका कोई असर नहीं है। बसों की जांच के बाद ही संबंधित रूट पर भेजी जाती है। पहले कुछ अव्यवस्थाएं थी लेकिन अब सब कुछ ठीक कर लिया गया है।