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बाहर की दवा का विरोध नर्स पर पड़ा भारी

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सांकेतिक तस्वीर
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बस्ती। शासन का निर्देश है कि अस्पताल में डॉक्टर बाहर की दवाएं कतई नहीं लिखेंगे, मगर यहां चिल्ड्रेन वार्ड में स्टाफ नर्स को इसका विरोध भारी पड़ गया। उसे तत्काल प्रभाव से एसआईसी ने वार्ड से हटा कर सहायक नर्सिंग अधीक्षक से संबद्ध कर दिया। इनके स्थान पर बाल रोग की सिस्टर प्रभारी ललिता कुमारी को लगाया गया।
पिछले कई दिनों से डॉक्टर के बाहर की दवाओं का विरोध सिस्टर इंचार्ज कुसुम चंद सहयोगियों के साथ कर रही थीं। वे डॉक्टर को बाहर की दवा लिखने से भी मना करती रहीं, मगर सब कुछ चलता रहा। सप्ताह भर से कुसुम चंद व उनकी सहयोगी नर्स डॉक्टरों की बाहरी दवा का उपयोग भी बंद कर दी थीं। हालांकि इससे किसी मरीज पर कोई प्रभाव नहीं था, मगर नर्सों के विरोध के चलते डाक्टरों की दुकान पर प्रभाव पड़ने लगा। इसके बाद डाक्टरों ने सिस्टर इंचार्ज कुसुम चंद की शिकायत एडी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डा. सीके शाही से की। डा. शाही शनिवार को जिला अस्पताल पहुंच गए। यहां एसआईसी के साथ वे चिल्ड्रेन वार्ड में पहुंच कर कुसुम चंद को ऐसा करने से मना किया, लेकिन सिस्टर इंचार्ज ने एक पत्र लिखकर बाहर की दवा के प्रयोग का आदेश मांगा, जिससे दोनो अधिकारी उखड़ गए। इसके बाद घंटों डॉक्टरों के साथ बंद कमरे में बातचीत हुई और कुसुम चंद पर गाज गिराते हुए उन्हें बाल रोग विभाग से हटा दिया गया।
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कुसुम का आरोप है कि एडी, एसआईसी व डॉक्टरों की साठगांठ से बाहर की दवाएं मरीजों को लिखी जा रही हैं। इसके विरोध का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा है।
एसआईसी डा. एके श्रीवास्तव ने कहा कि डॅाक्टर व नर्सों के बीच तालमेल का अभाव होने के कारण स्थिति बिगड़ने के आसार बढ़ गए थे। इसका प्रभाव मरीजों पर पड़ सकता है। इसे दृष्टिगत रखते हुए कुसुम को हटाया गया है। यह कोई कार्रवाई नहीं है, बल्कि उन्हें दूसरे स्थान पर तैनाती दी गई है।
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