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भर्ती जिला अस्पताल, बाहर की दवा -

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जिला अस्पताल में बाहर की दवा
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बस्ती।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी योगी सरकार का आदेश बेअसर है। जिला अस्पताल में मरीज भर्ती तो किए जा रहे हैं लेकिन दवाएं बाहर से आती हैं। यह हम नहीं बल्कि स्थितियां बयां कर रही हैं।
दो दिन पूर्व डीएम अरविंद सिंह की तल्खी भी डॉक्टरों की सेहत पर कोई असर नहीं डाल सकी। सबसे ज्यादा बद्तर स्थिति उस आईसीयू वार्ड की है, जहां एईएस और जेई के बच्चे भर्ती होते हैं। यहां बंद कमरे में पंखा भी काम नहीं कर रहा है। इसके अलावा समय से पहले पैदा होने वाले बच्चों के लिए बनाए गए वार्ड में रखी मशीनें दगा दे गई हैं।
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सरकार का दावा है कि गरीबों का सरकारी अस्पताल में इलाज मुफ्त हो। दवाएं भी उपलब्ध कराई जाएं। यह तो हुआ कागजी आदेश। अब धरातल पर नजर डालिए तो यहां सबसे पहले सर्जिकल वार्ड में घायल मरीज के तीमारदार इंद्रावती कहती हैं कि साहब इमरजेंसी में दिखाकर आज ही भर्ती किए हैं। सुई और कुछ दवाएं डॉक्टर ने बाहर से लिखीं थीं, उसे ले आए तब जाकर इलाज शुरू हुआ। इसी वार्ड में ऑपरेशन के बाद भर्ती मरीज के तीमारदार ओम प्रकाश पांडेय कहते हैं कि जिला अस्पताल में दो दिन पूर्व ऑपरेशन हुआ है मगर सभी दवाएं बाहर से ही मंगाई गई थीं। इसके अलावा इंजेक्शन लगाने के लिए सुई और विगो भी बाहर से खरीद कर लाया गया है। और तो और डॉक्टर ने ऑपरेशन के लिए तीन सौ रुपये फीस की रसीद दी और जमा कराया 25 सौ रुपये। रामपुर निवासी अब्दुल रहमान कहते हैं कि गांव में मारपीट हुई थी। इसमें भाई को चोट लग गई। उसके हाथ में फ्रैक्चर हो गया है। डॉक्टर ने छह हजार रुपये ऑपरेशन का खर्च बताया है। वे आपरेशन कहां करेंगे? यह बाद में बताने को कहे हैं। चिल्ड्रेन वार्ड के आईसीयू में भर्ती एईएस के मरीज के तीमारदार मोहम्मद हनीफ कहते हैं कि बच्चे के लिए सुई और दवाओं का इंतजाम बाहर से खरीद कर किया गया। एकाध दवाएं ही यहां से मिल सकीं। गुड्डू की बेटी भी इसी वार्ड में भर्ती है। उन्होंने कमोवेश ज्यादातर दवाओं को बाहर से खरीद कर लाने की बात कही है।
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आईसीयू में नहीं चल रहीं मशीनें
बच्चों के लिए बनाए गए आईसीयू वार्ड का निरीक्षण दो दिन पूर्व जिलाधिकारी ने किया था। यहां सभी मशीनें बंद थीं। तत्काल इसे व्यवस्थित कराने का निर्देश अस्पताल के जिम्मेदारों ने रद्दी की टोकरी में डाल दिया। रविवार को अमर उजाला टीम ने यहां के हालात का जायजा लिया तो वार्ड में इतनी उमस और गर्मी थी कि लोग पंखा झलते हुए मिले। कुसौरा निवासी खुर्शीद अहमद और अजय शंकर ने कहा कि इस वार्ड में भर्ती होने से बेहतर है कि बाहर बरामदे में ही बेड लगाकर बच्चों को रखा जाए वरना गर्मी से इनकी मौत भी हो सकती है। लालबहादुर ने बताया कि बिजली के अभाव में यहां कोई भी मशीन संचालित नहीं हो रही है। डॉक्टर केवल औपचारिकता निभा रहे हैं।
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