बस्ती। जिले में संचालित 67 गो आश्रय स्थलों पर 12.38 लाख खर्च कर संरक्षित पशुओं के लिए ठंड से बचाव के कार्य कराए जाएंगे। घेरबाड़ यानी तिरपाल समेत बिछावन बदला जाएगा। इसके लिए शासन ने दिशा-निर्देश जारी कर दिया है।
ठंड के मौसम में गोआश्रय केंद्र में संरक्षित गोवंशों को बचाने की कवायद तेज हो गई। सभी आश्रय केंद्रों और कान्हा गोशाला के बाहरी भाग में तिरपाल लगाकर बर्फीली हवाओं को रोका जाएगा। इतना ही नहीं, संरक्षित गोवंशों को काऊ कोट पहनाने की व्यवस्था भी की जाएगी।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार गुप्ता ने सभी आश्रय केंद्रों के नामित पंचायत सचिव को आश्रय केंद्र पर ठंड से बचाव की समुचित व्यवस्था के साथ ही हरे चारे का प्रबंध करते हुए गोवंशों का पोषण करने के निर्देश दिए हैं।
जिले में पांच वृहद गोआश्रय केंद्र के साथ ही छह कांजी हाउस व 55 अस्थायी गोआश्रय केंद्र और तीन कान्हा गोशाला संचालित हैंं। इन आश्रय केंद्रों में 4403 गोवंश संरक्षित हैं, तो 447 गोवंश योजना के तहत पालकों की सुपुर्दगी में दिए गए हैं।
ठंड के मौसम में संरक्षित गोवंशों को सुरक्षित करने के लिए पशुपालन विभाग सभी आश्रय केंद्रों पर तिरपाल, काऊ कोट, हरा चारा, पानी व बिजली की व्यवस्था में जुटा है।
ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव व केयरटेकर को आश्रय केंद्र पर संरक्षित गोवंशों को ठंड से बचाव के लिए व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। पशु चिकित्सकों को नियमित आश्रय केेंद्र जाकर गोवंशों के स्वास्थ्य का परीक्षण करने को कहा गया है। सीवीओ ने आश्रय केंद्रों पर व्यवस्थाओं की जांच के लिए नामित नोडल अफसरों को पत्र जारी किया है।
सीवीओ डॉ. अरुण कुमार गुप्ता ने आश्रय केंद्र का स्थलीय निरीक्षण कर संरक्षित गोवंश, तिरपाल, हरा चारा, भूसा, पानी व बिजली व्यवस्था के साथ ठंड से बचाव के अन्य उपायोें की रिपोर्ट देने के लिए कहा है। साथ ही सीवीओ ने सुविधाओं की कमी और ठंड से गोवंश की मौत होने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है। कहा है कि गोवंश के संरक्षण में कोई कोताही नहीं होनी चाहिए।