गौर। अक्तूबर माह में आंगनबाड़ी केंद्रों पर तैनात कार्यकर्ताओं की ओर से कराए गए सर्वे में चौंकाने वाला मामला सामने आया है। गौर ब्लाक क्षेत्र में 116 बच्चे अति गंभीर बीमारी से ग्रसित मिले हैं। इन्हें सैम श्रेणी में रखा गया है। जबकि मैम श्रेणी में कुल 326 बच्चे चिह्नित हुए हैं। इससे हड़कंप की स्थिति है।
अति गंभीर बीमारी व सामान्य श्रेणी के बच्चों के चिह्नांकन को लेकर शासन के निर्देश पर बाल विकास पुष्टाहार विभाग की ओर से हर माह सर्वे कराया जाता है। इसमें अति गंभीर बीमारी से ग्रसित बच्चों की पहचान कराकर उनकी निशुल्क दवा कराई जाती है। गौर ब्लाॅक में कुल 221 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं। जहां कुल बच्चों की संख्या 12915 है। जिसमें 6 माह से 3 वर्ष के बच्चों की संख्या 6110 व तीन वर्ष से छह वर्ष के बच्चों की संख्या 5987 है। जबकि जीरो से 6 माह के बच्चों की संख्या 818 है।
गर्भवती महिलाओं की संख्या 912 व धात्री महिलाओं की संख्या 765 है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर तैनात कार्यकर्ता व सहायिकाएं हर माह गंभीर बीमारी से ग्रसित बच्चों के साथ धात्री एवं गर्भवती महिलाओं की रिपोर्ट तैयार करती है। अक्तूबर माह के सर्वे में 116 अति गंभीर बीमारी से ग्रसित में सैम श्रेणी के बच्चे चिह्नित हुए हैं। जबकि 326 मैम श्रेणी के बच्चे मिले हैं। गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चों को सैम श्रेणी व सामान्य बीमारी से ग्रसित बच्चों को मैम श्रेणी और अल्प वजन व स्वस्थ बच्चों को सामान्य श्रेणी में रखा जाता है।
अति गंभीर बीमारी से ग्रसित बच्चों को जिला अस्पताल में बने पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया जाता है। जहां उन्हें निशुल्क दवा, भोजन, दूध, फल आदि उपलब्ध कराया जाता है। सीडीपीओ बलराम सिंह ने बताया कि बच्चों की शिक्षा व बीमारियों को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। गंभीर बीमारी से ग्रसित बच्चों को अस्पताल भेजवाया जा रहा है।