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मनरेगा में मजदूरों को भुगतान करने की योजना फ्लाप

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मंडल में मनरेगा श्रमिकों को समय से भुगतान नहीं हो रहा है। विलंब शुल्क के रूप में मिलने वाली क्षतिपूर्ति भी श्रमिकों के खाते में नहीं भेजी जा रही है। नियमानुसार 15 दिन में भुगतान न करने पर इसके लिए दोषी कर्मियों को क्षतिपूर्ति के रूप में श्रमिकों को विलंब शुल्क देना होता है। मगर एक भी श्रमिक के खाते में इस वित्तीय वर्ष में विलंब शुल्क नहीं भेजा गया। जबकि कुल 14.41 लाख की धनराशि श्रमिकों का बकाया है।
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इसमें सबसे अधिक सिद्धार्थनगर में 3.92 लाख, संतकबीरनगर में 3.69 लाख और बस्ती में 2.60 लाख रुपये बकाया है। बस्ती व सिद्धार्थनगर में 14-14 और संतकबीर नगर में नौ सहित मंडल में कुल 37 ब्लॉक हैं। इन ब्लॉकों में लगभग आठ लाख पंजीकृत श्रमिक हैं। सरकार की मंशा श्रमिकों को काम करने के बाद 15 दिन में भुगतान कराने की है। इसमें अगर कोई अधिकारी असफल रहता है तो उसे क्षतिपूर्ति के रूप में श्रमिकों के खाते में विलंब शुल्क जमा करना होता है। अभिलेखों के मुताबिक इस वित्तीय वषे में 88 दिन बीत गए मगर एक भी जिम्मेदार अधिकारी ने मनरेगा श्रमिकों के खाते में विलंब शुल्क नहीं जमा किया। इसमें बस्ती का साऊंघाट मंडल में इकलौता ब्लॉक हैं जहां पर विलंब शुल्क का बकाया नहीं है। संयुक्त विकास आयुक्त बीवी पांडेय ने बताया कि इसके लिए सभी सीडीओ को पत्र लिखा गया है।
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