अब तक टैक्स के दायरे से बाहर रहने वाले मैरिज हाल के संचालकों को भी पहली जुलाई से टैक्स देना होगा। कमाई का हिसाब-किताब भी रखना होगा। इसके लिए सबसे पहले इन्हें वाणिज्यकर विभाग में पंजीकरण कराना और जीएसटी से जुड़ना होगा। बिना पंजीकरण संचालन करते पकड़े जाने पर टैक्स की चोरी के आरोप में भारी जुर्माना भरना होगा।
सहायक आयुक्त वाणिज्यकर आलोक कुमार तिवारी ने बताया कि हर साल लाखों का कारोबार करने वाले मैरिज हाल को भी अब टैक्स देना होगा। सभी मैरिज हाल के संचालकों को सबसे पहले पंजीकरण कराकर टिन नंबर लेना होगा। उसके बाद जीएसटी में माइग्रेशन और एनरोलमेंट कराना होगा। इसके लिए कार्यालय में हेल्पडेस्क खोला गया है।
पहली जुलाई के बाद होगी कार्रवाई
पहली जुलाई से जीएसटी लागू होते ही वाणिज्यकर विभाग की पहली कार्रवाई अपंजीकृत मैरिज हाल संचालकों के विरुद्घ होगी। विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि हम लोग जीएसटी के लागू होने का इंतजार कर रहे हैं। बताया कि हर साल लाखों रुपये की कमाई करने वाले यह लोग सरकार को टैक्स के रूप में कुछ भी नहीं देते थे, नियम कानून से बंधें रहने के कारण विभाग इन पर कार्रवाई नहीं कर पा रहा था। जिले में लगभग 50 ऐसे मैरिज हाल है जो हर साल करोड़ों रुपये का कारोबार करते हैं। टैक्स के दायरे में आ जाने से सरकार को राजस्व का लाभ होगा।