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कत्थक में वर्षा मेघ, भोजपुरी गीतों ने बांधी समा

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कथक में बरसे मेघ, भोजपुरी गीतों ने बांधा समां - फोटो : अमर उजाला
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बस्ती। राजकीय इंटर कॉलेज के लकदक खूबसूरत मंच पर बस्ती महोत्सव के आगाज के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों की छटा बिखरी। मंच पर कत्थक नृत्य के माध्यम से मेघ बरसे तो कल्पना पटवारी के भोजपुरी गीतों से लोग झूम उठे। कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा।
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जिला प्रशासन की बस्ती महोत्सव की सोच सोमवार को मंच पर साकार हुई। पहले उद्घाटन के बाद देर शाम सांस्कृतिक कार्यक्रम महोत्सव को ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार हो गया। सबसे पहले राग मल्हार की प्रस्तुति पं. जय किशन के शिष्यों ने ये बरखा ऋतु आई... से दी। दिल को सिहराने वाले बादलों की चमक और गड़गड़ाहट के बीच कलाकारों के पांव थिरके तो मानो धरती पर बारिश की बूंदें गिरने लगीं। करीब बीस मिनट की प्रस्तुति में घर से लेकर खेत खलिहान तक को परंपरागत ढंग से नृत्य के माध्यम से कलाकारों ने परोसा। नृत्य की ऐसा समां बंधा कि लोग एकटक उनके भाव भंगिमा को निहारने को विवश हो गए।
इसके बाद बारी आई भोजपुरी गीतों की। मंच पर जैसे ही ओसोमी परिधान में कल्पना पटवारी उतरीं, लोगों ने तालियों से उनका स्वागत किया। इसके बाद शिव साधना कर... जेकर नाथ भोलेनाथ ऊ अनाथ कइसे होई के बाद अपने आदर्श डा. भूपेन हजारिका को दिल हूम-हूम करे घबराए... गीत गाकर याद किया। गीतों की स्वर लहरी बिखरी तो एक के बाद एक भोजपुरी गानों की झड़ी कल्पना ने लगा दी। उनकी आवाज का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोला। इसके बाद भिखारी ठाकुर की रचना से उन्होंने प्रभु श्रीराम को याद किया। कबीर को भी याद करना कल्पना नहीं भूलीं। हम तो नईहर के बांटी रसीली कि लोगवा पागल कहे ला... के बाद हाथ में मेहंदी मांग सिंदूरवा बर्बादी कजरवा होई गइले... कुछ दिन छुट्टी लेकर रहा ये बलम जी..प्रस्तुत कर सभी को झूमने पर विवश कर दिया। देर रात तक चले कार्यक्रम में जिले के प्रशासनिक अधिकारी और अन्य लोग मौजूद रहे।
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