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जोन प्रभारी ब्रह्मस्वरूप समेत 9 ने छोड़ी बसपा

Mon, 15 May 2017 01:33 AM IST
बरेली।  
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Zone 9 left, including Brahmaparthi - फोटो : बरेली, अमर उजाला
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नसीमुद्दीन सिद्दीकी को आउट किए जाने के बाद बहुजन समाज पार्टी में खलबली मची हुई है। पार्टी के भविष्य पर सवाल उठाते हुए बहस होने लगी है तो कल तक पार्टी के सहारे दम भरने वाले प्रमुख पदाधिकारी और नेता अपने लिए किनारा ढूंढने लगे हैं। तो नसीमुद्दीन के कारण पहले बसपा से किनारे हुए थे, अब वहां अपने लिए जगह ढूंढ रहे हैं। मंडल की सियासत में बसपा से बड़ा नाम रहे जोन प्रभारी ब्रह्म स्वरूप सागर ने पद और पार्टी दोनों छोड़ दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि बसपा में सिर्फ वसूली एजेंट बनकर रह गए थे। उधर, बीसलपुर के अनीस अहमद खां उर्फ फूलबाबू के बसपा में शामिल होने के बाद पहले पार्टी से निकाले गए या छोड़ गये अन्य नेता भी बड़े नेताओं के संपर्क में है ताकि वह बसपा से फिर जुड़ सकें।  
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सिद्दीकी को बाहर किए जाने के बाद से ही बसपा में आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला चल रहा है। उसी दिन से यह तय हो गया था कि जो सिद्दीकी के नजदीकी रहे हैं उन पर गाज कभी भी गिर सकती है। टिकटों के बंटवारे में बरेली से अहम जिम्मेदारी निभाने वाले ब्रह्म स्वरूप सागर ने अपराह्न में इस्तीफा दिया तो उनके बाद कुछ और नेताओं ने इस्तीफे दिये। आंवला से बसपा विधानसभा प्रत्याशी रहे अगम मौर्य ने भी पार्टी छोड़ दी है। उन्हें भी टिकट दिलवाने में सिद्दीकी की अहम भूमिका थी। जिला प्रभारी गंगाराम मौर्य जो कोआर्डिनेटर भी रहे हैं उन्होंने भी इस्तीफा दे दिया है। बहेड़ी विधान सभा प्रभारी डा. जयपाल, भोजीपुरा प्रभारी रामबाबू सागर, पूर्व जिला प्रभारी मयंक शुक्ला मोंटी, पूर्व ब्लाक प्रमुख शकुंतला मौर्य, पूर्व प्रदेश कार्यालय प्रभारी महबूब अली और रविनागर ने पार्टी छोड़ दी है। अली अब्बास जैदी पहले ही बसपा छोड़ चुके हैं। माना जा रहा है कि कुछ दिन और इस्तीफों और पार्टी में शामिल होने वालों का सिलसिला बसपा में चलेगा। 

पहले बैठक बाद में इस्तीफा
रविवार दोपहर नए पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी शमसुद्दीन राइन मंडलीय समीक्षा करने पहुंचे। राइन ने बकाया चंदा बुक और धनराशि मांगी। मंडल में आधा दर्जन से ज्यादा प्रत्याशियों पर बकाया है। जिलाध्यक्षों ने भी महीना नहीं पहुंचाया है। बकाया राशि मांगने पर मौजूद पदाधिकारी सकते में आ गए, क्योंकि इसी मुद्दे पर पूरी पार्टी में भूचाल आया है। जोन कोआर्डिनेटर ब्रह्म स्वरूप सागर ने राइन को विदाई दी। इसके बाद उन्होंने प्रेस में अपना इस्तीफा दे दिया। जानकारी लगते ही इस्तीफों का दौर शुरू हुआ और सागर समेत नौ पदाधिकारियों ने पार्टी दे दिया। 
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नए ठिकाने की तलाश
सिद्दीकी प्रकरण के बाद अब नए ठिकाने की तलाश शुरू हो गयी है। बसपा से अलग हो रहे नेताओं का खेमा सपा, कांग्रेस और भाजपा से हाथ मिलाने की कोशिश में हैं। इसे लेकर नेता अलग अलग खेमे में विभाजित हो गए हैं।

 दस वर्ष पहले बसपा में आए थे, विभिन्न पदों पर निष्ठा से काम किया। कुछ वर्षों से बसपा अपने मूल उद्देश्य से दूर हो गयी। नीतियां सही बनायी गयीं, सिर्फ धन वसूली उद्देश्य बनता जा रहा है। पदाधिकारियों को संगठन मजबूत कराने में लगाने की जगह उन्हें संग्रह अमीन बना दिया है। जोन कोआर्डिनेटर पद तो सिर्फ इसके लिए ही बनाया गया है। 
- ब्रह्म स्वरूप सागर

आंवला से प्रत्याशी बनाया गया, पूरा खर्च उठाया। पार्टी ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जिससे लोग जुड़ सकें। पार्टी से मदद नहीं मिलने से विधान सभा में जीत नहीं मिली। पार्टी नीतियों में सुधार नहीं हो रहा है।
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- अगम मौर्य
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