बरेली। सरकार की आरे से चलाई जा रही प्रधानमंत्री रोजगार सृजन, पीएम विश्वकर्मा योजना, स्टार्ट अप इंडिया, मुद्रा लोन आदि योजनाओं के तहत बैंकों से ऋण लेकर युवा तरक्की की सीढ़ी चढ़ रहे हैं। अपने सपनों को पंख लगाने के साथ ही वह दूसरों को भी रोजगार मुहैया करा रहे हैं। हम ऐसे ही कुछ लोगों के संघर्ष की कहानी बयां कर रहे हैं।
डिजिटल मशीन लगाकर बढ़ाया कारोबार
शशांक अग्रवाल ने कई साल पहले बड़ा बाजार में पेपर प्रिंटिंग रोल, डिब्बे बनाने का कारखाना लगाया था। उन्होंने बताया कि व्यापार बहुत छोटे पैमाने पर था। इसे विस्तार देने के लिए बहुत प्रयास किया। कठिन परिस्थितियों में भी काम किया। फिर सरकारी योजना के तहत ऋण लेकर नई डिजिटल मशीन मंगवाई। इससे उनका कारोबार चल निकला। अब शहर के कई नामी प्रतिष्ठानों से ऑर्डर मिल रहा है। अब वह अपने कारखाने में 8-10 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।
एक से कर ली चार दुकान, 40 लोगों को दिया रोजगार
रामपुर गार्डन में एक रेस्टोरेंट से शुरुआत करने वाले प्रतीक तनेजा आज चार अन्य दुकानों के मालिक हैं। वह 40 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि छह साल पहले उन्होंने छोटी सी दुकान से शुरुआत की थी। फूड प्रोसेसिंग के लिए ऋण लेकर उन्होंने कारोबार को बढ़ाया। अब डीडीपुरम समेत अन्य पॉश इलाके में उनके चार अन्य आउटलेट हैं। वह बंद-मक्खन के साथ स्ट्रीट फूड का पूरा काम कर रहे हैं। उन्होंने सरकार की योजना की सरहाना की है।
नौकरी छोड़कर कारोबारी बन गए मनु
प्राइवेट नौकरी करने वाले मनु का मन भर गया तो उन्होंने छोटे से कमरे में फिनायल का काम शुरू कर दिया। आज उनके उत्पाद का इस्तेमाल देशभर में हो रहा है। रजऊ में फैक्टरी चलाने वाले मनु ने बताया कि वर्ष 2013 में उन्होंने ऋण लेकर कारोबार को बढ़ाया। कोरोना महामारी के दौरान जब सैनिटाइजर की सबसे ज्यादा मांग थी तो उनकी फैक्टरी ने प्रदेशभर में इसकी आपूर्ति की। वर्ष 2016 में भी उन्होंने फैक्टरी का विस्तार किया। अब मुंबई में भी ऑफिस खोल लिया है। संवाद