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फटे गद्दों पर ही करा दिए जिम्नास्टिक के ट्रायल

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बरेली। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय की अंतर महाविद्यालयी जिम्नास्टिक प्रतियोगिता मजाक बनकर रह गई। सिर्फ पांच खिलाड़ी आने से प्रतियोगिता की जगह ट्रायल कराने पड़े और उसमें भी बदइंतजामी हावी रही। स्पोर्ट्स स्टेडियम में फटे गद्दों पर ट्रायल करा दिए। खिलाड़ियों का कहना था कि गद्दे खराब होने के कारण वे असहज महसूस कर रहे थे। एक लड़की बीम का संतुलन बिगड़ने पर गिर भी गई, हालांकि उसने खुद को संभाल लिया।
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13 से 15 नवंबर महिला और 17 से 19 नवंबर पुरुष वर्ग की आल इंडिया जिम्नास्टिक प्रतियोगिता जीएनडीयू अमृतसर में होने वाली है। प्रतियोगिता कराकर टीम चुनने के लिए शनिवार को विश्वविद्यालय की अंतर महाविद्यालय प्रतियोगिता होनी थी, लेकिन टीमों के पंजीकरण ही नहीं हुए। बरेली कॉलेज से अमन कुमार, बबीता, कोमल सेनी, आरपीडी मीरगंज की योगिता और लोटस कॉलेज के मोहित ने ही पंजीकरण कराया। खिलाड़ियों के न आने से प्रतियोगिता की जगह शनिवार को स्पोर्ट्स स्टेडियम में ट्रायल कराए गए। ट्रॉयल दने पहुंचे खिलाड़ियों ने जब फटे गद्दे देखे तो वे हैरान रह गए। धूल भरे गद्दों को खुद ही उठाकर डाला। बीम के नीचे फटा गद्दा डाला गया। नेशनल स्तर की खिलाड़ी योगिता जब प्रदर्शन करने आई तो खुद को असहज महसूस कर रही थी। आखिरकार उसके पैर लड़खड़ा ही गए और वह नीचे गिर गई। हालांकि नीचे गिरते वक्त उसने खुद को संभाल लिया। पूछने पर उसने बताया कि ऐसे गद्दे होंगे तो खिलाड़ी की एकाग्रता भंग होती है। तीन बार स्कूल स्तर की नेशनल प्रतियोगिता खेल चुके बरेली कॉलेज के अमन कुमार का कहना था कि व्यवस्थाएं अच्छी हों तभी प्रदर्शन बेहतर हो सकता है। खिलाड़ियों ने जैसे तैसे ट्रायल दिया।
सिर्फ दो खिलाड़ियों का हुआ चयन
ट्रायल में शामिल पांच खिलाड़ियों में से सिर्फ दो का ही चयन यूनिवर्सिटी की टीम में हुआ। इसमें बरेली कॉलेज के अमन कुमार और आरपीडी कॉलेज की बीपीएड की छात्रा योगिता। दोनों ही खिलाड़ी कई बार नेशनल प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुके हैं और मेडल भी जीते हैं। इस बार भी उम्मीद है कि इंटर यूनिवर्सिटी में मेडल जीतेंगे।
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कोच बोले लिखकर दे चुके हैं कई बार
जिम्नास्टिक कोच सोनू का कहना है कि इन दिनों करीब पचास खिलाड़ी प्रैक्टिस करने आते हैं। सुविधाओं को लेकर कई बार स्टेडियम प्रशासन से लिखा, लेकिन अभी तक सुधार नहीं हुआ।
‘जिम्नास्टिक में बहुत कम खिलाड़ी आते हैं। पांच खिलाड़ी आए थे, इसलिए ट्रायल कराकर चयन किया गया। विश्वविद्यालय के पास जिम्नास्टिक कोच नहीं है। इसलिए ट्रायल स्टेडियम में कराने पड़े। वहां क्या व्यवस्थाएं रहीं इसके बारे में जानकारी नहीं है।’
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- प्रोफेसर एके जैतली, क्रीड़ा सचिव विश्वविद्यालय
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