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Bareilly News: फोन की लत से मुक्ति के लिए हॉबी से जुड़ रहे युवा

Sat, 05 Sep 2026 01:45 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
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बरेली। फोन की लत से छुटकारा पाने के लिए युवा अनोखे तरीके अपना रहे हैं। खदु को डिजिटल डिटॉक्स करने के लिए वे अपनी हॉबी और काम से जुड़ रहे हैं। उनका मानना है कि काम और शौक में व्यस्त रहने से ध्यान फोन पर कम जाता है। कई युवा पेंटिंग बना रहे हैं। कुछ खेलों के जरिये खुद को डिजिटल डिटॉक्स कर रहे हैं। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि फोन की लत हर वर्ग के लोगों को है। अक्सर दस मिनट का संदेश पढ़ने के चक्कर में व्यक्ति घंटों दूसरे एप्लिकेशन पर बिता देता है। इसका असर हमारी भावनात्मक, मानसिक और मनोवैज्ञानिक स्थिति पर पड़ता है।
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युवाओं ने साझा किए अनुभव

जॉब की वजह से मैं दिन में फोन कम ही देख पाता हूं। रात में इसका ज्यादा इस्तेमाल करता हूं, लेकिन इन दिनों शारीरिक गतिविधियां बढ़ाकर खुद को डिजिटल डिटॉक्स करने की कोशिश कर रहा हूं। - राजबाबू


दिनभर कॉलेज के दौरान बीच-बीच में फोन देखती रहती हूं, लेकिन जब से डिजिटल डिटॉक्स के बारे में जाना है, तब से मैंने चैस खेलना व पेंटिंग करना शुरू किया है। इससे फोन पर ध्यान नहीं जाता। - उद्यांशी
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फोन देखने की आदत से परेशान होकर मैंने काम में व्यस्त रहने का निर्णय लिया। इस दौरान मैं डिजिटल गैजेट्स का इस्तेमाल नहीं करता। फोन का इस्तेमाल एक घंटे से ज्यादा न हो, इसका ध्यान रखता हूं। - प्रांजल


अपनों के साथ बिताएं समय

फोन की लत से शारीरिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। इसलिए घर में अपनों के साथ समय बिताना चाहिए। ऐसा माहौल बनाना चाहिए, जिससे दूसरे भी प्रेरित हों। इसका सर्वाधिक असर तीन से छह साल के बच्चों पर होता है, क्योंकि वे देखकर अधिक सीखते हैं। - डॉ. सुरभि श्रीवास्तव, मनोविज्ञान विभाग, रानी अवंतीबाई राजकीय महिला महाविद्यालय
निर्धारित करें सीमाएं


डिजिटल माध्यमों का अत्यधिक उपयोग केवल समय की बर्बादी ही नहीं, बल्कि यह चिंता, चिड़चिड़ापन, ध्यान में कमी, नींद की समस्या व अकेलेपन को जन्म देता है। डिजिटल डिटॉक्स का अर्थ तकनीक छोड़ना नहीं है, बल्कि सीमाएं बनाना है। नियंत्रण कठिन होने लगे तो मनोवैज्ञानिक की सहायता लेनी चाहिए। - डॉ. हेमा खन्ना, मनोविज्ञान विभाग, बरेली कॉलेज
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