बरेली। शहर के युवा पहलवान अपनी मेहनत और लगन से जिले का नाम रोशन कर रहे हैं। छोटी उम्र से ही अखाड़े की मिट्टी में पसीना बहाकर ये खिलाड़ी अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। इनकी प्रतिबद्धता और संघर्ष से अन्य युवा भी प्रेरणा ले रहे हैं। परिवार के सहयोग और खुद की कड़ी मेहनत से ये खिलाड़ी आज उस मुकाम पर हैं, जहां से वे भारतीय टीम तक पहुंचने और ओलंपिक पदक जीतने का सपना देख रहे हैं।
विरासत में मिली पहलवानी
नकटिया निवासी जतिन (16) को पहलवानी विरासत में मिली है। पिता और अन्य परिजनों के खेल के प्रति रुझान ने उन्हें भी अखाड़े की ओर खींच लिया। जतिन ने बताया कि परिवार के प्रोत्साहन से ही वह इस मुकाम तक पहुंचे हैं। उन्होंने पटना में आयोजित खेलो इंडिया प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता था। वह भारतीय टीम के कैंप में भी हिस्सा ले चुके हैं। उनका लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में वह देश का प्रतिनिधित्व करें।
शिक्षा के माहौल में भी खेल का जुनून
सदर निवासी शब्द (11) के परिजन शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हैं, लेकिन उन्होंने अखाड़े का रुख किया। शब्द कहते हैं कि उनका सपना ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीतना है। वह रोज चार घंटे अभ्यास करते हैं। उन्होंने वाराणसी में आयोजित प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता था। कम उम्र में मिली सफलता ने उनके आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा दिया है।
परंपरा को आगे बढ़ा रहे अभिनव
नकटिया निवासी अभिनव (17) के पिता भी पहलवान रहे हैं और चाचा कुश्ती के कोच हैं। इसी वजह से उनका रुझान इस खेल की ओर बढ़ा। अभिनव रोज अखाड़े में अभ्यास करते हैं। उनकी मेहनत का नतीजा यह रहा कि वह खेलो इंडिया प्रतियोगिता में रजत पदक जीत चुके हैं। अभिनव का कहना है कि वे आने वाले समय में भारतीय टीम का हिस्सा बनकर देश को गौरवान्वित करना चाहते हैं। संवाद