जिम्नास्टिक में शहर की नन्हीं प्रतिभाएं दिखा रहीं दम
बरेली। स्पोर्ट्स स्टेडियम में सुबह-शाम कम उम्र के बच्चे जिम्नास्टिक के अभ्यास में पसीना बहाते नजर आते हैं। इनकी उम्र भले ही कच्ची है, लेकिन इरादे पक्के हैं। ये बच्चे जिम्नास्टिक में अपना भविष्य बनाने के लिए समर्पित हैं। बच्चों को प्रशिक्षण देने वाले कोच राजेश यादव बताते हैं कि जिम्नास्टिक सीखने के लिए अनुशासन और नियमित अभ्यास जरूरी होता है और ये बच्चे इसमें किसी से पीछे नहीं हैं। रोज निर्धारित समय पर पहुंचकर कठिन अभ्यास करना इनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है।
आराध्या ने खेल को बनाया लक्ष्य
12 वर्षीय आराध्या जायसवाल की मां बॉडी बिल्डर हैं। आराध्या बताती हैं कि उनकी मां फिटनेस के प्रति काफी जागरूक हैं। इसी कारण वह भी खेलों में रुचि रखती हैं। गर्मी की छुट्टियों के दौरान उन्होंने जिम्नास्टिक कैंप में हिस्सा लिया था। इस दौरान उन्हें कब इस खेल से गहरा लगाव हो गया, पता ही नहीं चला। आराध्या ने नियमित अभ्यास शुरू किया और वर्ष 2024 में हुई राष्ट्रीय जिम्नास्टिक चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
नन्हे भाई-बहन की जोड़ी दिखा रही हुनर
नौ वर्षीय लक्षिता सिंह और छह वर्षीय आदिशेष चचेरे-तहरे भाई-बहन हैं। खेल के प्रति दोनों की प्रतिबद्धता एक जैसी है। आदिशेष के पिता खुद जिम्नास्टिक और मार्शल आर्ट्स के खिलाड़ी रह चुके हैं। वह बताते हैं कि लक्षिता और आदिशेष घर में भी घंटों तक जिम्नास्टिक का अभ्यास करते हैं। दोनों को इस खेल के प्रति इतना लगाव हो गया है कि वे हर वक्त नए-नए करतब सीखने की कोशिश करते हैं। अब तक वे कई प्रतियोगिताओं में भाग ले चुके हैं।
बड़े भाई से प्रेरित होकर दीपांशु ने चुनी राह
13 वर्षीय दीपांशु गुप्ता ने बड़े भाई को देखकर जिम्नास्टिक को चुना। तीन साल पहले उन्होंने जिम्नास्टिक का प्रशिक्षण लेना शुरू किया और अब अपनी मेहनत के बल पर इस खेल में सफलता हासिल कर रहे हैं। दीपांशु ने बताया कि जब जिम्नास्टिक शुरू किया था, तब वह कई बार चोटिल भी हुए थे, लेकिन कभी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने कड़ी मेहनत की और प्रयागराज में हुई प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में अलग-अलग स्पर्धाओं में चार कांस्य पदक हासिल किए।
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