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फिक्र बढ़ाते हालात.. संक्रमित महिला और युवक में नहीं दिखे स्पष्ट लक्षण

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संक्रमित महिला को अस्पताल से ले जाते स्वास्थ्य कर्मी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों के डॉक्टरों को दिया संक्रमण से बचाव का प्रशिक्षण

बरेली। कोरोना संक्रमण जिस खामोशी से फैल रहा है, वह स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ाने वाला है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक फरीदपुर की महिला और पीलीभीत के युवक ने खुद शक में जांच तो कराई, लेकिन उनमें कोरोना के लक्षण स्पष्ट नहीं थे। इसमें सबसे बड़ा खतरा यह है कि ऐसे संक्रमितों के संपर्क में और लोग आते रहते हैं और उनमें भी संक्रमण फैलने के आसार बढ़ जाते हैं। उधर, सोमवार को ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से आईएमए में आयोजित एक कार्यक्रम में निजी डॉक्टरों को संक्रमण से बचाव का प्रशिक्षण दिया गया।
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डॉक्टरों के मुताबिक बगैर लक्षण के ही संक्रमित निकलने वाले मरीजों को एसिम्प्टोमैटिक संक्रमित कहा जाता है। संक्रमित होने के बावजूद इनमें लक्षण प्रकट नहीं होते। लिहाजा उनके संपर्क में आने वालों की संख्या भी ज्यादा हो सकती है। इसी उहापोह के बीच सोमवार को आईएमए में स्वास्थ्य विभाग की ओर से निजी डॉक्टरों को अस्पताल में आने वाले मरीजों के इलाज के दौरान स्टाफ को सुरक्षित रखने, इंफेक्शन फैलने से रोकने जैसी जानकारियां दी गई। नोडल अफसर एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम ने बताया रेड जोन में दर्ज होने पर बरेली के सभी चिकित्सालयों को इंफेक्शन प्रिवेंशन प्रोटोकॉल लागू हो गया है। इसके तहत अस्पताल में ओपीडी संचालन के लिए किसी मंजूरी की जरूरत नहीं है। मगर, सोशल डिस्टेंसिंग और संक्रमण से बचाव के लिए पर्याप्त सुविधाएं होनी चाहिए। इसके अलावा इमरजेंसी भर्ती के लिए मंजूरी का होना बेहद जरूरी है। बताया कि अब तक करीब 20 निजी अस्पतालों ने मंजूरी के लिए आवेदन किया है। फाइनल अप्रूवल डीएम देंगे।
मुख्य प्रशिक्षक डा. सौरभ सिंह ने बताया अगर कोई ऐसा मरीज अस्पताल में आए जिसे पांच दिन से बुखार हो और सांस लेने में तकलीफ हो रही है, उसका सबसे पहले कोरोना टेस्ट कराना चाहिए। संक्रमण से बचने के लिए अस्पताल को सैनिटाइज किया जाना जरूरी है। अस्पताल में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो। रिसेप्शन से पांच मीटर की दूरी होना जरूरी है। एसीएमओ डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि संक्रमण से बचाव के इंतजाम न होने पर अस्पताल में चिकित्सा सुविधा न दी जाए। संदिग्ध मरीजों की जांच कराकर सूचना सीएमओ कार्यालय में देना अनिवार्य है। प्रशिक्षण के दौरान आईएमए अध्यक्ष डॉ. राजेश अग्रवाल, डॉ. राजीव गोयल समेत अन्य आईएमए पदाधिकारी और डॉक्टर मौजूद रहे।

पूरी करनी होगी इन्फेक्शन प्रिवेंशन प्रोटोकॉल की शर्त

कोरोना संक्रमित मिलने के बाद हॉटस्पॉट घोषित ब्रह्पुरा और हजियापुर में चल रही स्क्रीनिंग के दौरान मंगलवार को 44 टीमों ने क्रमिक 3480 घरों का सर्वे किया। इसके साथ ही, इस दौरान सात लोग बाहर से आए हुए मिले, जिन्हें क्वारंटीन किया गया है। एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम ने बताया कि जांच के लिए भेजे गए 65 सैंपल की रिपोर्ट मंगलवार को निगेटिव आई है। वहीं मंगलवार को लिए गए सैंपल को जांच के लिए बुधवार की सुबह आईवीआरआई भेजा जाएगा।

किशोर सदन, वृद्धाश्रम समेत अन्य आश्रय गृहों में स्क्रीनिंग

मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. वागीश वैश्य के नेतृत्व में किशोर सदन, वृद्धाश्रम, नारी निकेतन व आश्रय गृहों में पहुंचकर स्क्रीनिंग की गई। थर्मल स्क्रीनिंग के दौरान नारी निकेतन में दो संवासिनियों को हल्का बुखार मिलने पर उन्हें दवा दी गई। इसके अलावा अन्य कहीं भी बुखार, जुकाम, सर्दी, खांसी से पीड़ित नहीं मिला। डॉक्टरों ने सभी को साफ सफाई रखने, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने का सुझाव दिया है।

डॉक्टर-स्टाफ के 39 लोगों ने पूरा किया क्वारंटीन पीरियड

उत्तरांचल की एक कोरोना संक्रमित महिला के संपर्क में आने वाले एक निजी मेडिकल कॉलेज के स्टाफ का क्वारंटीन पीरियड पूरा होने पर उनका फूल बरसाकर स्वागत किया गया। बता दें कि मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ व अन्य 21 अप्रैल से क्वारंटीन हुए थे। 14 दिन बाद चार मई को उनकी क्वारंटीन अवधि पूरी होने पर उनका स्वागत किया। दूसरी ओर, इसी मेडिकल कॉलेज के पूर्व में लिए गए 15 पूल में से एक पूल पॉजिटिव आया था। उसमें शामिल तीन डॉक्टर और तीन नर्स का मंगलवार को फिर सैंपल लिया गया है।
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