बरेली। तंबाकू में करीब सात हजार केमिकल होते हैं जिनमें से करीब 70 केमिकल कैंसर पैदा करने वाले होते हैं। कैंसर के एक-चौथाई मामलों की वजह तंबाकू ही होती है। रुहेलखंड क्षेत्र जहां तंबाकू का लोग बहुतायत में इस्तेमाल करते हैं, वहां कैंसर के मामलों में हर साल 20 फीसदी की वृद्धि हो रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक कैंसर से बचाव तभी किया जा सकता है जब शुरुआती लक्षण उभरते ही इलाज शुरू कर दिया जाए।
एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. पवन मेहरोत्रा के मुताबिक पुरुषों में मुंह और गले के साथ अब बड़ी आंत का कैंसर भी तेजी से फैल रहा है। रुहेलखंड क्षेत्र में हर साल कैंसर के करीब बीस फीसदी मरीज बढ़ जाते हैं। तंबाकू का सेवन इसका सबसे बड़ा कारण है। उन्होंने बताया कि मुंह के अंदर गाल और जीभ में सफेद दाने होना, गुटखा और पान मसाला चबाने वाले लोगों का का मुंह दांत के बीच चार सेमी से भी कम खुलना और मुंह का कोई भी छाला या घाव इलाज के बाद भी ठीक न होना कैंसर के प्रमुख लक्षण हैं। ऐसे लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज शुरु कर देना चाहिए।
एक-चौथाई से ज्यादा कैंसर तंबाकू की वजह से
2025 तक कैंसर का सबसे आम रूप ब्रेस्ट कैंसर 2.4 लाख होने का अनुमान है। फेफड़ों के कैंसर के 1.1 लाख और मुंह के कैंसर के 90 हजार मामले सामने आ सकते हैं। भारत में कैंसर के कुल मामलों में करीब 27 प्रतिशत तंबाकू जनित होने की संभावना जताई गई है। नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम रिपोर्ट 2020 के अनुसार 2020 में कुल मामलों में 27.1 प्रतिशत यानी 3.71 लाख मामले तंबाकू से संबंधित कैंसर के हैं। महिलाओं में सबसे ज्यादा ब्रेस्ट कैंसर के दो लाख जबकि सर्विक्स कैंसर के 75 हजार केस होने का अनुमान है। कैंसर के सारे मामलों में से गैस्ट्रोइंटेस्टिनल ट्रैक्ट के कैंसर सबसे ज्यादा हैं जो करीब 2.7 लाख होने का अनुमान है।
2025 तक 16 लाख हो सकते हैं कैंसर मरीज
नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम रिपोर्ट 2020 के अनुसार इस वक्त देश में कैंसर के 13.9 लाख मामले हैं जो 2025 तक 15.7 लाख तक हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अनुमानित तौर पर 2016 में 12.6 लाख और 2019 में 13.6 लाख मामले होने की बात कही गई है। यह अनुमान 2012 और 2016 के बीच हुए डेटा कलेक्शन पर आधारित हैं।
ऐसे होती है कैंसर की जांच
मुंह में सफेद चकत्ते को खरोंच कर माइक्रोस्कोप से देखकर कैंसर का पता लगाया जाता है। इसके साथ सुई का प्रवेश कर एफएनएसी जांच और प्रभावित क्षेत्र का टुकड़ा निकालकर बायोप्सी जांच की जाती है।
इसलिए पड़ जाती है तंबाकू की आदत
तंबाकू में निकोटीन काफी मात्रा में होता है जिसे चबाने पर वह खून के माध्यम से दिमाग के एक हिस्से डोपामिन रिसेप्टर में पहुंचता है। इससे दिमाग में ऐसे रसायन बनते हैं जो अच्छा महसूस कराते हैं। गुटखे में कत्थे के स्थान पर मिलाए जाने वाले गैंबियर में लार बनाने की प्रवृत्ति होती है इसलिए गुटखा न चबाने पर मुंह सूखा महसूस होती है इसीलिए गुटखा खाने वाला व्यक्ति मुंह खाली होते ही तुरंत दूसरा गुटखा दबा लेता है।
ऐसे कम करें कैंसर की आशंका
कैंसर से बचने के लिए गुटखा और पान मसाला का इस्तेमाल तुरंत छोड़ देना चाहिए। मुंह की सफाई दोनों समय ठीक से करनी चाहिए। हल्दी कैंसररोधी होती है इसलिए उसका रोज उपयोग करना चाहिए। खाने में टमाटर का उपयोग करने के साथ मौसम में आंवला, गाजर और आम का सेवन करें क्योंकि इनमें अच्छी मात्रा में एंटी आक्सीडेंट तत्व होते हैं।
कैंसर के प्रमुख कारण
- तंबाकू और उससे बने उत्पादों का सेवन।
- लंबे समय तक शराब का सेवन।
- जंक फूड और फास्ट फूड का इस्तेमाल ।
- शरीर में गांठें बनना। बार-बार एक्स-रे करवाना।
कैंसर के लक्षण
- अचानक शरीर का वजन बढ़ना या कम होना।
- कमजोरी और थकान होना।
- त्वचा के नीचे गांठ बनना।
- बोलने में दिक्कत महसूस होना
- बार-बार बुखार आना।