बरेली। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर से दिल्ली में स्मार्ट सिटी को लेकर हुई दो दिन की वर्कशाप में कंसल्टेंट एजेंसी के साथ प्रोजेक्ट बनाने के टिप्स दिए गए। वर्कशाप में देश-विदेश से आए विशेषज्ञों का कहना था कि हर शहर की जरूरतें अलग होती हैं। स्थानीय जरूरतों को देखकर ही स्मार्ट सिटी का प्रोजेक्ट बनाया जाए। वर्कशाप में नागरिक सुविधा के मौजूदा संसाधनों के विकास के साथ नए संसाधन विकसित करने के लिए वित्तीय आवश्यकताओं पर भी चर्चा हुई।
देर रात दिल्ली से लौटे नगर आयुक्त शीलधर सिंह यादव ने बताया कि दो दिवसीय वर्कशाप में हुई चर्चा प्रमुख रूप से स्मार्ट सिटी का प्लान बनाने पर केंद्रित थी। तकनीकी विशेषज्ञों ने कंसल्टेंट एजेंसी के बारे में जानकारी लेने के बाद प्रोजेक्ट बनाने की बारीकियां समझाईं। बरेली की ओर से शहरी विकास मंत्रालय के प्रतिनिधियों को स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट की प्रगति की जानकारी दी गई। वर्कशाप में बताया कि कंसल्टेंट एजेंसी के साथ मिलकर अपनी जरूरत के हिसाब से प्रोजेक्ट तैयार करें। प्रोजेक्ट में पहले से मौजूद नागरिक सुविधाओं (जैसे सीवर, पेयजल, पार्क सौंदर्यीकरण, वाटर मैनेजमेंट, ग्रीन बेल्ट आदि) को बेहतर बनाने और नए संसाधनों को विकसित करने के तरीके को हर हाल में शामिल किया जाए। नगर आयुक्त ने स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट में नगर निगम के अलावा प्रशासन, बीडीए, आवास विकास, डूडा, पीडब्ल्यूडी समेत अन्य एजेंसियों को शामिल करने का सुझाव रखा। नगर आयुक्त के मुताबिक सोमवार को कंसल्टेंट एजेंसी शहर में आ जाएगी। इसके बाद स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट बनाने का काम शुरू हो जाएगा।