क्योलड़िया। नकटपुर गांव में लकड़ी का एकमात्र पुल दर्जनों गांवों के लोगों को कैलाश नदी से पार कराता है। ग्रामीणों ने पुल बनवाए जाने के लिए न जानें कितने ही प्रयास किए लेकिन, एसी कमरों में बैठे जिम्मेदारों को कभी इनकी परेशानी नहीं दिखी। आज भी मुख्यालय तक पहुंचने के लिए इन लोगों को संघर्ष करना पड़ता है।
भदपुरा ब्लॉक के गांव नकटपुर के पास कैलाश नदी बह रही है। गांव ठिरिया बन्नोजान, बड़ागांव, नवादा इमामाबाद, डांडिया मिश्रा, अभयपुर, बिहारीपुर, अब्दुल रहमान समेत कई अन्य गांव के लोग नवाबगंज जाने के लिए इस पर बने लकड़ी के पुल से ही अपनी मंजिल तय करते हैं। मुख्यमंत्री योगी के साथ ही लोक निर्माण विभाग के मंत्री और उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर ग्रामीणों ने शीघ्र ही पुल बनवाए जाने की मांग की है।
अगर, पुल बन जाएगा तो ग्रामीणों की समस्या का समाधान जाएगा। ग्रामीणों ने बताया कि अस्थायी पुल से गुजरते समय हमेशा खतरा बना रहता है। आए दिन लोग गिरते-गिरते बचते हैं। कई बार हादसे हो भी चुके हैं।
बरसात के दिनों में सफर और मुश्किल
ग्रामीणों के लिए नवाबगंज जाना बरसात के दिनों में और मुश्किल हो जाता है। दरअसल, लकड़ी का पुल मानसून से पहले ही हटा लिया जाता है। ऐसे में ग्रामीणों को दोगुनी दूरी तय करके अपनी मंजिल के लिए जाना पड़ता है।
हर चुनाव में मिलती है आश्वासन की घुट्टी
विधानसभा से लेकर लोकसभा चुनाव में हर बार नेताओं का ग्रामीणों से वादा रहता है कि यहां स्थायी पुल बनाने के प्रयास किए जाएंगे। लेकिन, चुनाव बीत जाने के बाद कोई जनप्रतिनिधि इन ग्रामीणों की समस्या की सुध नहीं लेता है।
बातचीत:
मानसून के दौरान तहसील मुख्यालय जाने के लिए हमें 20 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। अगर यहां पक्का पुल बन जाए तो समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। हर बार नेता आश्वासन देते हैं मगर, सार्थक पहल अब तक नहीं हुई। - मेवाराम गंगवार
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लकड़ी का पुल होने से ओसवाल चीनी मिल तक गन्ना की आपूर्ति करने में परेशानी आती है। लंबे समय से हम लोग पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं मगर जिम्मेदार सुध नहीं ले रहे। लकड़ी का पुल होने की वजह से आए दिन यहां हादसे भी होते हैं। - भगवानदास