बरेली। महिला जनप्रतिनिधियों को घूंघट की ओट से बाहर आना ही होगा। अब पंचायतों में उनके पति के हस्तक्षेप को प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लिया गया है। शासन से निर्देश मिलने पर डीएम ने भी आदेश जारी कर कहा है कि पंचायतों में चयनित महिला जनप्रतिनिधि एवं सदस्य बैठकों में स्वयं प्रतिभाग करें। उनके संबंधियों से कार्य करने को प्रतिबंधित किया गया है।
सर्वोच्च न्यायालय से छह जुलाई 2023 को पारित आदेश के क्रम में प्रमुख सचिव अनिल कुमार ने मंडलायुक्त और डीएम को निर्देश जारी कर कहा है कि पंचायत के विभिन्न पदों पर निर्वाचित महिला पदाधिकारियों के पति या अन्य संबंधियों को पदीय दायित्वों का संचालन करने से रोका जाए। इस पर डीएम अविनाश सिंह ने शुक्रवार को जिला पंचायत, पंचायती राज विभाग के अधिकारियों और ब्लॉकों में बीडीओ को निर्देश जारी कर निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के पति और अन्य संबंधियों को बैठकों में प्रतिभाग करने से रोकने के लिए कहा है।
पंचायत के 1196 पदों पर महिला पदाधिकारी
जिले में पंचायत के 1196 पदों पर महिलाएं निर्वाचित हैं। इसमें सबसे अधिक 585 महिला ग्राम प्रधान शामिल हैं। जिला पंचायत के 60 वार्डों में से 33 से महिलाएं सदस्य निर्वाचित हैं। क्षेत्र पंचायत सदस्य के 1460 में से 569 पदों पर महिलाएं निर्वाचित हैं। जिले के 15 में से नौ ब्लॉकों में महिला प्रमुख हैं। इनमें अधिकतर महिलाओं के पति ही उनके पदीय दायित्वों का संचालन कर रहे हैं। संवाद
डीएम की तरफ से जारी निर्देशों का पालन शुरू हो गया है। सभी एडीओ पंचायत को भी निर्देश जारी कर दिए गए हैं। उनसे कहा गया है कि निर्वाचित महिला पदाधिकारी ही पंचायत की बैठकों में शामिल होंगी। इस बारे में अभी तक कोई शिकायत नहीं आई है। - कमल किशोर, डीपीआरओ