बरेली। जिला महिला चिकित्सालय में इलाज के लिए पहुंच रही महिलाओं की थॉयराइड जांच नहीं हो रही। इसके लिए वह निजी केंद्र समेत जिला अस्पताल के चक्कर काट रही हैं।
गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. भारती सरन के मुताबिक, महिलाओं में पुरुषों की तुलना में थायराइड का खतरा अधिक रहता है। अस्पताल पहुंचने वाली 10 गर्भवतियों में से तीन को गर्भावस्था के दौरान इसका पता चलता है। गर्भावस्था के पहले महीने में ही थायराइड सहित सभी जरूरी जांचें करानी चाहिए। इस दौरान सही इलाज नहीं होने से बच्चे का विकास प्रभावित होने, ब्रेन में समस्या होने और गर्भपात तक की आशंका रहती है। इधर, महिला चिकित्सालय में गर्भवतियों की जांच के लिए मशीन ही नहीं है।
महिला चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. त्रिभुवन प्रसाद के मुताबिक, मशीन न होने से थायराइड जांच लैब में नहीं हो रही है। गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल भेजकर जांच करा रहे हैं। लैब में मशीन की उपलब्धता के लिए जल्द शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
प्रतिदिन करीब दस महिलाएं मिल रहीं चपेट में
महिला चिकित्सालय से थायराइड जांच के लिए जिला अस्पताल रेफर की गईं महिलाओं में से करीब दस में प्रतिदिन रोग की पुष्टि हो रही है। महिला अस्पताल में प्रतिदिन दो से तीन सौ की ओपीडी होती है। इसमें करीब सौ महिलाओं की रोजाना थायराइड जांच कराई जाती है। बताते हैं कि जिला अस्पताल की लैब में जांच में देर होने पर कई महिलाएं निजी केंद्रों पर जांच के लिए चली जाती हैं।
समय रहते पहचान जरूरी, ताकि हावी न हो बीमारी
डॉक्टर के मुताबिक, थायराइड ग्रंथि (टी-3, टी-4) गले के निचले हिस्से में तितली के आकार की होती है। यह शरीर की ऊर्जा खपत, तापमान, दिल की धड़कन, पाचन क्रिया को नियंत्रित करती है। जब यह ग्रंथि संतुलित रूप से काम नहीं करती तो कई तरह की समस्याएं होती हैं। समय से जांच न होने से हाइपोथायरायडिज्म, थकान, कमजोरी, दिमागी असंतुलन, अनियमित माहवारी होती है। ब्यूरो
इन बातों का रखें ख्याल
- आयोडीन, सेलेनियम से भरपूर संतुलित भोजन करें।
- रोजाना कुछ वक्त निकालकर व्यायाम जरूर कर लें।
- मानसिक तनाव से बचें, तनाव मुक्त दिनचर्या अपनाएं।
- बगैर डॉक्टर के सुझाव के थायराइड की दवा न खाएं।