बरेली। मामूली बारिश और आंधी में शहर की बिजली 20-20 घंटे गुल हो जाती है। शहर के 24 में से 15-16 उपकेंद्र, 11 व 33 केवी लाइनों में फाल्ट हो जाते हैं। यह यूं ही नहीं है। इसका प्रमुख कारण भ्रष्टाचार है।
मरम्मत, लाइनें बदलने के नाम पर की जा रही घपलेबाजी का खामियाजा शहर के लोगों को कटौती के रूप में भुगतना पड़ रहा है। विद्युत निगम में भ्रष्टाचारियों का सिंडिकेट व्यवस्था नहीं सुधरने दे रहा।
अधिशासी अभियंता महावीर सिंह के रिश्वत लेते वीडियो वायरल होने के बाद अधिकारियों पर कई सवाल उठ रहे हैं। जो दो वीडियो वायरल हुए हैं, उनमें से एक में ठेकेदार और दूसरे में सहायक अभियंता रिश्वत दे रहा है।
निलंबन की कार्रवाई केवल रिश्वत लेने वाले अधिशासी अभियंता के खिलाफ की गई। इससे पहले फरीदपुर में एक संविदा लाइनमैन के घर पर छापा मारकर विजिलेंस ने 28 मीटर बरामद किए थे। यहां मीटरों में छेड़छाड़ की जा रही थी। इस मामले में केवल संविदा लाइनमैन की सेवा समाप्त कर दी गई।
इसमें पांच जेई, दो एसडीई व एक्सईएन के नाम भी सामने आए थे, पर उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। इसकी जांच पूरी होने से पहले फर्जी बैंक चेकों से 32 लाख रुपये के बिजली बिल जमा करने का प्रकरण खुल गया।
इस मामले में भी कैशियर को निलंबित कर दिया गया। दो माह के बाद भी किसी जिम्मेदार पर आंच नहीं आई है। इस दौरान बरेली-पीलीभीत हाईवे पर पांच करोड़ से लाइन शिफ्टिंग में भी घपला सामने आ गया। इसकी जांच भी लंबित है। संवाद