इसके बाद परिवार के लोग महिला को अशुभ बताकर उसे ताने देने लगे व उसे नीचा दिखाने लगे। इतने पर भी जब उनका जी नहीं भरा तो उन्होंने महिला को उसके पति की मौत का कसूरबार बताना शुरू कर दिया।
फिर गांव वालों संग मिलकर उसे उसी के घर से निकाल बाहर किया। दर-दर की ठोकरें खाने के बाद दुखियारी महिला नवाबगंज के रामलीला मैदान के पास आकर एक टूटी-फूटी झोपड़ी में रहने लगी। इस झोपड़ी में रहते रहते उसने यहां 10 साल गुजार दिए।
people near women dead body
रविवार रात महिला की ठंड के कारण मौत हो गई। आसपास के रहने वाले लोगों ने महिला की मौत की खबर तहसील प्रशासन और पुलिस महकमे को दी मगर मौके पर कोई नहीं पहुंचा। बहुत समय बीत जाने के बाद पुलिस पहुंची तो सही लेकिन कोई मदद नहीं मिली।
आखिर में महिला के अंतिम संस्कार का जिम्मा उन लोगों ने संभाला जो महिला को रोजाना खाना देकर जाते थे। इनमें से एक युवक जिसका नाम मोहम्मद यासीन है उसने महिला के शव का हिंदू रीति-रिवाज के मुताबिक अंतिम संस्कार किया। इसमें यासीन के साथ अन्य पांच लोगों ने भी मदद की। आसपास के लोगों ने बताया महिला का नाम शांति था।