बरेली। जिले में आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती प्रक्रिया में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। सत्यापन के दौरान 38 अभ्यर्थियों के आवेदन फर्जी निवास और आय प्रमाण पत्र लगाने के कारण निरस्त कर दिए गए हैं। इन महिलाओं ने शादी के बाद भी मायके के निवास प्रमाण पत्र और एपीएल कार्ड धारक होने के बावजूद बीपीएल प्रमाण पत्र लगाए थे।
यह भर्ती प्रक्रिया पिछले सात माह से चल रही है। शहरी क्षेत्र सहित 16 ब्लॉकों में आंगनबाड़ी सहायिकाओं के 705 रिक्त पदों के लिए 18 नवंबर 2025 से ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे, जिसकी अंतिम तिथि आठ दिसंबर 2025 थी। कुल 5376 आवेदन प्राप्त हुए थे। जांच में 38 आवेदनों में आय और निवास प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए, जिसके बाद उन्हें निरस्त कर दिया गया। भुता ब्लॉक में दो, मझगवां में 16, फरीदपुर में पांच, मीरगंज में दो, शेरगढ़ में एक, रामनगर में तीन, नवाबगंज में पांच, आलमपुर-जाफराबाद में दो और भोजीपुरा में एक प्रमाण पत्र फर्जी मिला। शहरी क्षेत्र की जांच रिपोर्ट अभी लंबित है। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में भी 168 शिकायतों में से 21 सही पाई गई थीं, जिन्हें निरस्त किया गया था।
एमएससी पास अभ्यर्थियों ने किया आवेदन
आंगनबाड़ी सहायिका के पदों के लिए उच्च शिक्षित अभ्यर्थी भी आवेदन कर रहे हैं। इंटर तक की योग्यता वाले इस पद के लिए एमएससी फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ जैसे विषयों के स्नातकों ने भी आवेदन किया है। उन्हें चार हजार रुपये का मानदेय दिया जाएगा। अधिकारियों ने उन्हें अधिक योग्यता के अनुरूप अन्य अवसर तलाशने की सलाह दी है। हालांकि, अभ्यर्थियों को भविष्य में मानदेय बढ़ने और नौकरी के सरकारी होने की उम्मीद है।
भर्ती के निर्धारित मानक
उसी ग्राम या वार्ड की बीपीएल विधवा महिला को वरीयता दी जाती है। इसके बाद तलाकशुदा या परित्यक्ता और फिर बीपीएल श्रेणी की महिलाओं को प्राथमिकता मिलती है। अंत में गरीबी रेखा से ऊपर (एपीएल) की विधवा, तलाकशुदा या परित्यक्ता और फिर एपीएल श्रेणी की महिलाओं को वरीयता दी जाती है।
वर्जन
आवेदन करने वाले ऐसे अभ्यर्थी हैं जो शादी के बाद भी ससुराल की जगह मायके का प्रमाणपत्र लगाई हैं। वहीं काफी संख्या में अभ्यर्थियों ने आय प्रमाणपत्र फर्जी लगाया है। पिछली बार भर्ती में कई मामले फर्जी पाए गए थे, जिसको देखते हुए इस बार पहले ही सतर्कता बरती गई। -देवयानी, सीडीओ