बरेली। जिम ट्रेनिंग आमतौर पर पुरुषों का पेशा माना जाता है, लेकिन अब यह मिथक टूट रहा है। अब महिलाएं भी इस पेशे में अहम भूमिका निभा रहीं हैं। इस क्षेत्र में कदम बढ़ाकर महिलाओं ने समाज के समक्ष नया उदाहरण पेश किया है। बतौर जिम ट्रेनर महिलाएं, पुरुषों को भी फिटनेस का पाठ पढ़ा रहीं हैं। साथ ही, वह अपनी और अपने परिवार की सेहत का भी ख्याल रख रहीं हैं।
पति से प्रेरित होकर बनीं जिम ट्रेनर
मैंने पति की मदद करने के मकसद से जिम जाना शुरू किया। मेरे पति जिम ट्रेनर हैं और मुझे लगा कि मैं भी उनके काम में हाथ बंटा सकती हूं। इसी क्रम में मैंने व्यावसायिक कोर्स किया और अब 15 वर्षों से महिलाओं को ट्रेनिंग दे रही हूं। शुरुआत में मुझे झिझक हुई, लेकिन मेरे परिवार ने हमेशा मेरा साथ दिया। अब मैं न केवल खुद को फिट रखती हूं, बल्कि दूसरों को भी स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करती हूं। - मोनिका भाटिया
मिस इंडिया का जीता खिताब
छह साल पहले मैंने जिम ट्रेनर बनने का फैसला किया। परिवार को शुरुआत में यह पसंद नहीं आया, लेकिन मैं निरंतर प्रयास करती रही। मिस इंडिया बॉडी बिल्डिंग का खिताब जीतने के बाद न केवल मेरे परिवार का नजरिया बदला, बल्कि उन्होंने मेरा पूरा समर्थन किया। आज मैं महिलाओं और पुरुषों दोनों को जिम ट्रेनिंग देती हूं। मैंने अपनी बेटियों को भी इस दिशा में प्रेरित किया है। वे अब एथलीट और क्रिकेटर बनने के लिए तैयार हैं। - रश्मि छाबड़ा
फिटनेस के जुनून ने बनाया जिम ट्रेनर
मुझे बचपन से ही फिटनेस में दिलचस्पी थी। स्कूल के दिनों में मैं वॉलीबॉल की खिलाड़ी थी और बाद में पावरलिफ्टिंग में भी हाथ आजमाया। खेल के इस सफर ने मुझे सिखाया कि शारीरिक फिटनेस के साथ मानसिक मजबूती भी जरूरी है। इसी जुनून के चलते मैंने जिम ट्रेनर बनने का फैसला लिया। अब मैं महिलाओं को फिटनेस के गुर सिखाती हूं और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती हूं। - अनीता गंगवार
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