बरेली। अपनी ही नाबालिग बेटी का दुष्कर्म कराने वाली महिला और दोषी (महिला का प्रेमी) को स्पेशल जज पाॅक्सो एक्ट ने 20-20 साल कैद और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। घटना दिसंबर 2019 की है।
पीड़िता के पिता की ओर से दर्ज कराई गई रिपोर्ट के मुताबिक, उसकी पत्नी का जोगी नवादा निवासी युवक से प्रेम प्रसंग था। एक साल पहले वह प्रेमी के साथ चली गई थी। उसकी 14 साल की बेटी अपने पिता के साथ रहती थी। नौ दिसंबर 2019 को बेटी बाजार से लौट रही थी। रास्ते में उसको मां मिल गई और बेटी को अपने साथ प्रेमी के घर ले गई। वहां मां ने अपने प्रेमी को भी बुला लिया। वह नाबालिग के साथ अश्लील हरकतें करने लगा। नाबालिग ने विरोध करते हुए भागने की कोशिश की तो मां ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। युवक ने नाबालिग के मुंह में कपड़ा ठूंस दिया और दुष्कर्म किया।
पीड़िता के पिता ने 13 दिसंबर 2019 को अपनी पत्नी और उसके प्रेमी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। विवेचना के बाद पुलिस ने कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाह और 12 साक्ष्य कोर्ट में पेश किए गए। कोर्ट ने पीड़िता की मां और उसके प्रेमी को कैद व जुर्माने की सजा सुनाई। संवाद
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फरार चल रहे इंस्पेक्टर रामसेवक को अंतरिम जमानत
रिश्वत लेकर स्मैक तस्करों को थाने से छोड़ने का है आरोप, बीमारी के आधार पर कोर्ट से राहत
बरेली। रिश्वत लेकर थाने से स्मैक तस्करों को छोड़ने के मामले में फरार चल रहे फरीदपुर थाने के पूर्व इंस्पेक्टर रामसेवक को स्पेशल जज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम ने अंतरिम जमानत दे दी है। उसकी स्थायी जमानत पर सुनवाई के लिए कोर्ट ने पांच फरवरी की तिथि तय की है।
इंस्पेक्टर रामसेवक ने फरीदपुर थाने में तैनाती के दौरान 21 अगस्त की रात स्मैक तस्कर आलम, नियाज अहमद और अशनूर को हिरासत में लेने के बाद बिना कार्रवाई छोड़ने के लिए नौ लाख रुपये में सौदा किया था। सात लाख रुपये मिलने के बाद आलम और नियाज को थाने से छोड़ दिया। एसपी साउथ ने टीम के साथ इंस्पेक्टर के आवास पर छापा मारा तो वहां से 9.85 लाख रुपये बरामद हुए। इंस्पेक्टर सरकारी पिस्टल और 10 कारतूस लेकर दीवार कूदकर भाग गया। उसके खिलाफ फरीदपुर थाने में तीन मामले दर्ज हैं। पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर सकी, इधर उसने अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे को गलत बताते हुए हाईकोर्ट में उसे खारिज करने की अर्जी भी दे दी।
बुधवार को उसने वकील के जरिये कोर्ट में अंतरिम और स्थायी जमानत के लिए अर्जी दी। वह बीमारी की हालत में कोर्ट पहुंचा। उसको ड्रिप भी लगी हुई थी। उसके वकील ने कोर्ट में सामने उसके गंभीर रूप से बीमार होने का तर्क दिया। डॉक्टर की रिपोर्ट भी पेश की। इसके आधार पर कोर्ट ने रामसेवक को अंतरिम जमानत दे दी है। संवाद
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बीमा की रकम के भुगतान का दिया आदेश
बरेली। स्थायी लोक अदालत ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को पॉलिसी धारक महिला को डेंगू के इलाज पर आए 23,524 रुपये खर्च का भुगतान करने का आदेश दिया है। मुकदमा खर्च और मानसिक पीड़ा के लिए भी एलआईसी को 20 हजार रुपये भुगतान करना होगा।
शहर की निवासी चेतना श्रीवास्तव ने वर्ष 2019 में एलआईसी से मेडिकल पॉलिसी ली थी। वर्ष 2023 में उनको डेंगू हो गया। पति ने धर्मदत्त सिटी अस्पताल में उनका इलाज कराया। ठीक हो जाने के बाद चेतना ने इलाज में खर्च हुए 23,524 रुपये का क्लेम किया था। बीमा कंपनी ने यह कह कर दावा खारिज कर दिया कि वह पहले से ही बीमारी से ग्रस्त थीं। चेतना ने क्लेम पर पुनर्विचार करने के लिए आवेदन दिया, लेकिन एलआईसी ने उसे भी खारिज कर दिया।
इसके बाद उन्होंने बीमा कंपनी के खिलाफ स्थायी लोक अदालत में शिकायत दर्ज कराई। लोक अदालत ने चेतना का दावा सही पाया। बीमा कंपनी को सात फीसदी ब्याज के साथ 23,524 रुपये अदा करने का आदेश दिया है। इसके अलावा 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च और 10 हजार मानसिक पीड़ा की क्षतिपूर्ति के लिए भी बीमा कंपनी को देना होगा। संवाद