बरेली।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने एडमिशन फार्म भरवाने को चुनी गई एजेंसी के लिए सारे नियम कायदे ताक पर रख दिए हैं। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि विवि ने एजेंसी के साथ बिना कोई करार किए फार्म भरवाने की जिम्मेदारी दे रखी है। इतना ही नहीं फार्म भरवाने के लिए परीक्षा फार्म से आठ गुना ज्यादा भुगतान करने की बात हो रही है। हैरानी की बात यह है कि लाखों रुपये के इस कार्य में वित्तीय विभाग को शामिल तक नहीं किया गया और न ही कोई जानकारी दी गई। सारे करार मौखिक ही कर लिए गए।
सूत्रों की मानें तो एक खास एजेंसी को फायदा पहुंचाने के लिए यह सब किया गया और अब इस सब को लेकर वित्तीय विभाग और प्रशासन में खींचतान भी मची हुई है।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के परीक्षा फार्म भरवाने के लिए एजेंसी को चार रुपये का भुगतान किया जाता है, जबकि एडमिशन फार्म के लिए इस एजेंसी को आठ गुना यानी 32 रुपये प्रति फार्म देने की बात हो रही है। विवि ने परीक्षा फार्म भरवाने के लिए टेंडर प्रक्रिया और ट्रायल के बाद एजेंसी चुनी थी, जबकि एडमिशन फार्म के लिए कोई प्रक्रिया ही नहीं अपनाई गई। यूपी डेस्को के माध्यम से एजेंसी को फार्म भरवाने का जिम्मा दे दिया गया। वित्तीय विभाग का कहना है कि एजेंसी कोई भी चुनी जाती पर उसके साथ करार होना चाहिए था। कितना पैसा छात्रों से लिया जाएगा और कितना एजेंसी को दिया जाएगा। एजेंसी उस पैसे के बदले क्या-क्या कार्य करेगी। अगर समझौता होता तो सारी बातें साफ होतीं।
एडमिशन फार्म के वित्तीय लेनदेन से जुड़ी कोई भी फाइल हमारे पास नहीं आई है। किस एजेंसी को कितने पैसों में फार्म भरवाने का जिम्मा दिया गया वित्तीय विभाग को जानकारी नहीं है। इसके बारे में जानकारी ली जाएगी।
- सुरेश उपाध्याय, वित्त अधिकारी विवि