बरेली। जनवरी की सर्द रात में गरीब मजदूर राजेश सुभाषनगर में मनोकामना मंदिर के पास एक दुकान के बाहर अपनी पत्नी के शव के पास बैठा है। पत्नी का ठीक से इलाज करा नहीं पाया। उसने अस्पताल में दम तोड़ दिया। घर लेकर आया तो मकान मालिक ने कहा छोटी सी कोठरी में शव कहां रखोगे। इसलिए दुकान का शटर खोल कर उसके बाहर शव रखवा दिया। इसी बीच मोहल्ले के लोगों तक उसकी कहानी पहुंची तो लोग जुटने लगे। अंत्येष्टि के लिए चंदा होने लगा। देर रात उसके पास करीब आठ हजार रुपये जमा हो गए थे और मोहल्ले वालों ने उसे भरोसा दिलाया है कि सुबह सिटी श्मशान में अंत्येष्टि भी करा देंगे।
राजेश रहने वाला बरेली का ही है लेकिन उसका कोई अपना घर नहीं है। कभी मजदूरी मिल जाती है कभी शादी ब्याह में बेटर बन जाता है। किराए के ही घर में पैदा हुआ। दो साल से वह बाबूराम के घर में किराए के एक कमरे में पत्नी के साथ रह रहा था। पत्नी बीमार हुई तो जिला अस्पताल ले गया। शाम करीब पांच बजे पत्नी ज्योति की मौत हो गई। राजेश शव को टैंपो से लेकर किराए के मकान में पहुंचा तो मकान मालिक ने शव बाहर ही रखने को कहा बाद में अपनी एक दुकान का शटर खोल दिया जिसके बाहर शव रखा है। सड़क पर शव देख कर लोग जुटने लगे और मदद करने लगे। मोहल्ले के जितेंद्र कश्यप ने बताया कि बृहस्पतिवार को सुबह अंत्येष्टि सिटी शमसान भूमि पर कर दी जाएगी।