जमात के स्थानीय संगठन ‘शूरा’ का एलान- पैरवी के साथ सारी जरूरतें भी पूरी की जाएंगी
बरेली। दिल्ली की निजामुद्दीन दरगाह में संक्रमित होने के बाद देश के कई इलाकों में संक्रमण फैलाने के आरोप में तबलीगी जमात के जिन 52 लोगों पर बरेली में मुकदमा चलेगा, उनकी मदद यहां के जमाती करेंगे। मंगलवार को कई जमाती जनपद न्यायालय भी पहुंचे, हालांकि सुनवाई ऑनलाइन होने के कारण आरोपियों के वकील से मिलकर लौट आए।
दरअसल तबलीगी जमात की बरेली में भी एक शाखा है जो यहां शूरा नाम से चलती है। इस शाखा से जुड़े लोगों ने बरेली में मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपी जमातियों की हर संभव मदद करने की बात कही है। शूरा के एक जिम्मेदार नफीस अहमद आजाद ने बताया कि कि तबलीगी जमात के जिन लोगों पर बरेली में मुकदमा चलेगा, वे लोग उनकी खुलकर मदद करेंगे। मुकदमे की पैरवी करने से लेकर कोई भी कानूनी मदद की जाएगी। आरोपी जमातियों को किसी और तरह की जरूरत पड़ेगी तो उसे भी पूरा किया जाएगा। नफीस ने बताया कि मंगलवार को पहले ही दिन सुनवाई के दौरान उनके संगठन के 7-8 लोग अदालत पहुंचे थे। अगली तारीख दो नवंबर को भी वे लोग अदालत पहुंचेंगे। उधर, आरोपी जमातियों के वकील मिलन गुप्ता ने बताया कि सभी विदेशी नागरिक अब कोरोना निगेटिव है। इनके मामले जल्द तय कराने की कोशिश की जाएगी ताकि वे सभी जल्द अपने देश लौट सकें।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश.. तेजी से निपटाए जाएं मुकदमे
तबलीगी जमात के लोगों पर सभी मुकदमे सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर स्थानांतरित किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश एक याचिका पर किया जिसमें याची ने कहा था कि अलग-अलग जिलों की अदालतों के अलग-अलग आदेश पारित करने से असमंजस पैदा हो रहा है लिहाजा इस स्थिति को खत्म करने के लिए कोई आदेश पारित किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इसके बाद देश भर के उच्च न्यायालयों को तबलीगी जमात के मामले तेजी से निपटाने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश में आठ जोन की स्थापना की, जिसमें आगरा, बरेली, गोरखपुर ,कानपुर, लखनउ , मेरठ, प्रयागराज और वाराणसी शामिल है।
ये धाराएं लगी हैं जमातियों पर
सरकारी आदेश का उल्लंघन करने की आईपीसी की धारा 188, समाज में अराजकता फैलाने पर आईपीसी की 268, किसी के जीवन को संकट में डालने और संक्रमण फैलाने पर आईपीसी की धारा 269 और संक्रमण फैलाने के लिए जानबूझकर कोई काम करने पर आईपीसी की धारा 270 आरोपी जमातियों पर लगाई गई हैं। इसके अलावा रोग की रोकथाम के लिए सरकारी व्यवस्था को तोड़ने पर महामारी अधिनियम 1987, वैध वीजा की शर्तों का उल्लंघन करने पर विदेशी अधिनियम 1946 और भारत सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करने से इनकार करने पर आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत पुलिस ने केस दर्ज किया था।