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भूखे रह लेंगे, पर बाहर फैक्टरियों में मजदूरी करने नहीं जाएंगे

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बहेड़ी में अपना नाम दर्ज कराते प्रवासी मजदूर। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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बहेड़ी। लॉकडाउन के बाद से उत्तराखंड में फंसे प्रवासी मजदूरों को जब रोडवेज बसों से घर भेजा गया तो उनकी आंखों में अलग ही चमक थी, लेकिन इस दौरान जो कष्ट भरे दिन उन्होंने गुजारे उसकी पीड़ा भी चेहरों पर साफ झलक रही थी। घर-परिवार छोड़कर सैकड़ों मील दूर रोजी रोटी की तलाश में आए इन मजदूरों में तालाबंदी का इस कदर खौफ बैठ गया था कि उन्होंने प्रण कर लिया कि अब चाहे जो हो जाए, कभी मजदूरी करने बाहर नहीं जाएंगे। भले उन्हें भूखा ही क्यों न रहना पड़े, लेकिन दूसरे प्रदेशों का रुख नहीं करेंगे। अब दोबारा वे ये दिन नहीं देखना चाहते। शनिवार को यूपी-उत्तराखंड बार्डर पर पहुंचे इन मजदूरों को प्रशासन ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद रोडवेज बसों को उनके घर रवाना कर दिया।
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लॉकडाउन के बाद से उत्तराखंड में फंसे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड समेत अन्य प्रदेशों के रहने वाले मजदूरों को जब पता चला कि अब सरकार ने उन्हें घर भेजने की व्यवस्था की है तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। जिन मजदूरों ने 14 दिन की क्वारंटीन अवधि पूरी कर थी, उनको उत्तराखंड सरकार बहेड़ी में जिले की सीमा पर भेज रही है। शाहजहांपुर की सीतादेवी और सीतापुर के मनोहर सिंह व ब्रह्म किशोर आदि मजदूरों ने कहा कि 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा हुई तो लगा ये दिन जैसे तैसे कट जाएंगे और फिर सब सामान्य हो जाएगा, मगर लॉकडाउन बढ़ता गया तो समस्याएं भी बढ़ती गईं। काम बंद हो चुका था और जो घर ले जाने के लिए पैसे बचाकर रखे थे वे भी पेट की आग बुझाने में खर्च हो गए। ठेकेदार ने कुछ समय तो मदद की, लेकिन बाद में उसने भी मुंह मोड़ लिया। उन्होंने कहा कि पेट की भूख ने इस लॉकडाउन में यह सबक दे दिया कि भूखे रह लेंगे, लेकिन अपना गांव छोड़कर दूसरे प्रदेशों की फैक्टरियों में कभी काम करने नहीं जाएंगे। इस एक महीने में उन्होंने जीवन भर के कष्ट सहन कर लिए हैं।
60 बसों से भेजे गए 1553 प्रवासी मजदूर
लॉकडाउन में हल्द्वानी, लालकुआं, काठगोदाम, टनकपुर, अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत, काशीपुर समेत उत्तराखंड के विभिन्न स्थानों पर फंसे प्रवासी मजदूरों को क्वारंटीन रखा गया था। इनमें से 1553 मजदूरों को शनिवार को उत्तराखंड सरकार ने रोडवेज बसों से उत्तर प्रदेश में बहेड़ी की सीमा पर भेजा। यहां स्क्रीनिंग के बाद मजदूरों को गन्ना उत्पादक महाविद्यालय में पहुंचाया गया। फिर रोडवेज की करीब 60 बसों से मजदूरों को उनके घर रवाना किया गया। इस दौरान रोडवेज के अधिकारी भी साथ रहे। एसपी देहात डॉ. संसार सिंह, एसडीएम सुधीर कुमार, सीओ रामानंद राय, इंस्पेक्टर पंकज पंत ने पूरी व्यवस्था का जायजा लिया। स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की टीम एसीएमओ डॉ. केसी जोशी के साथ मुस्तैद रही। मेडिकल टीम ने सभी प्रवासी मजदूरों के स्वास्थ्य की जांच की। प्रवासी मजदूरों में बरेली, पीलीभीत, बदायूं, शाहजहांपुर, इटावा, मैनपुरी, हमीरपुर, रामपुर, सीतापुर इन क्षेत्रों के ज्यादातर मजदूर शामिल रहे। इसके बाद उत्तराखंड से भेजी गई बीस और बसों से 480 मजदूरों को बहेड़ी स्थित आश्रय स्थल पहुंचाया गया।

उत्तराखंड से सुबह 11 बजे से बसें आना शुरू हो गई थीं। पूरी व्यवस्था की गई है। मजदूरों की मेडिकल जांच के बाद भोजन कराकर रोडवेज बसो से उनके गंतव्य तक भेजा जाएगा। शाम तक जितने भी मजदूर आयेंगे सभी की पूरी प्रक्रिया के बाद घर भेजा जायेगा। रोका किसी को नहीं जायेगा। सुधीर कुमार एसडीएम बहेड़ी

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