दरोगा निलंबित (सांकेतिक तस्वीर)
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पीलीभीत के दियोरिया रेंज के मटहेना गांव में जंगल से सटे इलाके में बाघिन ने ग्रामीणों को घायल कर दिया था जिससे गुस्साई भीड़ ने बाघिन को पीटकर मार दिया था। इस मामले में विभागीय लापरवाही भी सामने आई है। जांच में क्षेत्रीय वन दरोगा दिनेश गिरी की गश्त में लापरवाही मिलने पर उसे निलंबित कर दिया गया है, जबकि रेंजर के खिलाफ कार्रवाई के लिए रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जा रही है।
टाइगर रिजर्व की दियोरिया रेंज से सटे मटेहना गांव के कुछ ग्रामीण 24 जुलाई को जंगल सीमा में पहुंच गए थे। वहां पहले से मौजूद बाघिन ने ग्रामीणों पर हमला कर दिया था। इससे नौ लोग घायल हो गए थे। बाद में एक ग्रामीण की मौत हो गई थी। हमले से गुस्साए ग्रामीण लाठी-डंडे और धारदार हथियार लेकर मौके पर पहुंच गए और बाघिन की घेराबंदी कर पिटाई शुरू कर दी।
बाद में टाइगर रिजर्व के अफसर, पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। गंभीर रूप से घायल बाघिन मौके पर तड़पती रही। करीब दस घंटे बाद बाघिन ने दम तोड़ दिया था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में धारदार हथियारों के वार से बाघिन की मौत की पुष्टि हुई थी। वहीं अब आई विसरा रिपोर्ट के मुताबिक बाघिन के शरीर में जहर भी पहुंचा था।
विसरा रिपोर्ट मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने सारी कड़ियां जोड़ते हुए मामले यह पाया कि इस बाघिन ने एक जानवर का शिकार किया था। अधखाए शव पर ग्रामीणों या फिर शिकारियों ने उसे मारने के लिए जहर डाल दिया। बाघिन ने दोबारा उस जानवर का मांस खाया तो जहर उसके शरीर में पहुंच गया और उग्र होने के बाद उसने ग्रामीणों पर हमला कर दिया। माना गया कि यदि वन विभाग के कर्मचारियों ने गश्त की होती तो एक तो जहर डालने वाले लोगों का पता चल गया होता और बाघिन को अधखाया शव खाने से रोका जा सकता था।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डीएफओ नवीन खंडेलवाल ने कहा कि बाघिन की मौत के मामले में जांच के दौरान गश्त में लापरवाही की बात सामने आई है। जिस पर क्षेत्रीय वन दरोगा को सस्पेंड कर दिया गया है। जबकि रेंजर पर कार्रवाई के लिए रिपोर्ट तैयार की जा रही है। वहीं विसरा रिपोर्ट में बाघिन के शरीर में जहर की भी पुष्टि हुई है।