बरेली। नौकरी डॉट कॉम जैसी नामी वेबसाइट के कर्मचारियों को अपना भेदी बनाकर बरेली में फर्जी कॉल सेंटर चलाने वाली ठग कंपनी देश भर के नौजवानों को लूट रही थी। इनके सबसे सीनियर बॉस को सेंटर चलाने वालों ने भी आज तक नहीं देखा। ये लोग उसकी आवाज के कायल जरूर हैं। उसने आज तक जिसे भी कॉल की उसे बिना ठगे नहीं छोड़ा। पुलिस अब नंबरों के सहारे उसकी तलाश करेगी।
कृष्णा ने बताया कि उसने दिल्ली में रहकर प्राइवेट नौकरी की थी। वहीं उसकी मुलाकात संभल के बबराला निवासी युवक से हुई जो दिल्ली में ऐसा ही फर्जी कॉल सेंटर चला रहा था। उसके साथ काम करके अनुभव लिया और बरेली आकर सेंटर खोल लिया। शुरू में प्रशांत ने उसके यहां जॉब की और फिर रुपये जुटाकर प्रशांत ने पड़ोस के ही दूसरे घर में अपना कॉल सेंटर खोल लिया। बताया कि एक शख्स उनका भी बॉस है। उसे आज तक उन लोगों ने भी नहीं देखा है। वह शायद गोरखपुर क्षेत्र का है और मोबाइल पर ही उससे संपर्क हुआ है।
बताया कि जब लड़कियां सिक्योरिटी मनी के रूप में आवेदक से 1800 रुपये खाते में मंगा लेती थीं। उसके बाद कृष्णा उन्हें कॉल करके इंटरव्यू लेता था। एमसीए कृष्णा अलग अलग कंपनियों का एचआर हेड बनकर बात करता था और अधिकांश लड़कों को इंटरव्यू में फेल कर देता था। फिर लड़कियां उन लोगों से और रकम मंगाती थीं जो दस से बीस हजार तक होती थी। अधिकतम रकम 58 हजार तक वसूली गई है।
अक्सर जब बेरोजगारों को ठगी का शक होने लगता था तो यह लोग अपने बॉस को कॉल ट्रांसफर कर देते थे। वह इतने स्टाइल से बात करता है कि 90 फीसदी कस्टमर तत्काल पैसे खाते में डाल देते थे। ठग कंपनी ने इंटरव्यू के वक्त एक अनाथ स्टूडेंट को दया करके छोड़ दिया, बॉस ने उसे भी ठग लिया। कस्टमर से रकम निकालने के बदले बिग बॉस 30 फीसदी कमीशन लेता था। अगर वह अपने खाते में रकम डलवाता था तो उसका 15 फीसदी हिस्सा अलग लेता था।
गलत आईएफएससी कोड डालकर करते थे ठगी
ठग कंपनी ने टाटा मोटर्स, सैमसंग, सन फार्मा जैसी नामी कंपनियों के नाम से खाते आसपास की बैंकों में खुलवा रखे थे। इन्हीं कंपनियों का लेटर देते वक्त सिक्योरिटी मनी व अन्य रकम को जब ठग कंपनी किसी कस्टमर से खाते में डलवाती थी तो उसे खाता नंबर ही सही देती थी। बैंक का आईएफएसी कोड गलत दिया जाता था। इससे तकनीकी दिक्कत नहीं होती थी और खाता सही होने की वजह से पैसा सही जगह पहुंच जाता था। हालांकि आईएफएससी कोड महाराष्ट्र, मद्यप्रदेश जैसे स्थानों का दिखाने से बेरोजगार को लगता था कि वह ठगा नहीं जा रहा।
बेरोजगारों को दिए दिसंबर 2020 तक के जॉब लेटर
ठग कंपनी इंटरव्यू के बाद लड़कों को नौकरी के जो ज्वाइनिंग लेटर देती थी उन पर नवंबर व दिसंबर 2020 की डेट तक होती थी। इंटरव्यू में उन्हें बताया जाता था कि अभी कोरोना की वजह से दिक्कत है। वह लोग नवंबर या दिसंबर में जॉब के लिए पहुंचे। भरोसे में लोग यह लेटर लिए बैठे थे। जाहिर है कि इतने समय में ठग कंपनी अपना कॉल सेंटर दूसरी जगह लगा सकती थी।
नौकरी डॉट कॉम से खरीदते थे हर महीने 50 हजार का डाटा
प्रशांत ने पुलिस को बताया कि वह लोग नौकरी डॉट कॉम जैसी नामी वेबसाइट के कुछ कर्मचारियों से आवेदकों का डाटा खरीदते थे। पांच हजार नंबरों की लिस्ट करीब 15 हजार में मिलती थी। वह महीने भर में करीब 50 हजार का डाटा खरीदकर उससे लाखों कमाते थे।
प्रमाणित वेबसाइट के नाम पर बेरोजगारों से ठगी की जा रही थी। बारादरी पुलिस ने शानदार गुडवर्क किया है। इन आरोपियों से जुटाई जानकारी पर आगे भी कार्रवाई होगी। - शैलेश पांडेय, एसएसपी